27-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप जो
पढ़ाते हैं, उसे अच्छी रीति पढ़ो तो 21 जन्मों के लिए सोर्स ऑफ इनकम हो जायेगी, सदा
सुखी बन जायेंगे''
प्रश्नः-
तुम बच्चों के
अतीन्द्रिय सुख का गायन क्यों है?
उत्तर:-
क्योंकि तुम
बच्चे ही इस समय बाप को जानते हो, तुमने ही बाप द्वारा सृष्टि के आदि मध्य अन्त को
जाना है। तुम अभी संगम पर बेहद में खड़े हो। जानते हो अभी हम इस खारी चेनल से अमृत
के मीठे चेनल में जा रहे हैं। हमें स्वयं भगवान पढ़ा रहे हैं, ऐसी खुशी ब्राह्मणों
को ही रहती है इसलिए अतीन्द्रिय सुख तुम्हारा ही गाया हुआ है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) हम गॉडली स्टूडेन्ट हैं, इसलिए पढ़ाई का नशा भी रहे तो अपने
कैरेक्टर्स पर भी ध्यान हो। एक दिन भी पढ़ाई मिस नहीं करनी है। देर से क्लास में
आकर टीचर की इनसल्ट नहीं करना है।
2) इस विकारी छी-छी दुनिया से ऩफरत रखनी है, बाप की याद से अपनी आत्मा को
पवित्र सतोप्रधान बनाने का पुरुषार्थ करना है। सदैव खुश, हर्षितमुख रहना है।
वरदान:-
होपलेस में भी
होप पैदा करने वाले सच्चे परोपकारी, सन्तुष्टमणी भव
त्रिकालदर्शी बन हर आत्मा
की कमजोरी को परखते हुए, उनकी कमजोरी को स्वयं में धारण करने या वर्णन करने के बजाए
कमजोरी रूपी कांटे को कल्याणकारी स्वरूप से समाप्त कर देना, कांटे को फूल बना देना,
स्वयं भी सन्तुष्टमणी के समान सन्तुष्ट रहना और सर्व को सन्तुष्ट करना, जिसके प्रति
सब निराशा दिखायें, ऐसे व्यक्ति वा ऐसी स्थिति में सदा के लिए आशा के दीपक जगाना
अर्थात् दिलशिकस्त को शक्तिवान बना देना - ऐसा श्रेष्ठ कर्तव्य चलता रहे तो परोपकारी,
सन्तुष्टमणि का वरदान प्राप्त हो जायेगा।
स्लोगन:-
परीक्षा
के समय प्रतिज्ञा याद आये तब प्रत्यक्षता होगी।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
सारे दिन में
बीच-बीच में एक सेकण्ड भी मिले, तो बार-बार यह विदेही बनने का अभ्यास करते रहो। दो
चार सेकण्ड भी निकालो इससे बहुत मदद मिलेगी। नहीं तो सारा दिन बुद्धि चलती रहती है,
तो विदेही बनने में टाइम लग जाता है और अभ्यास होगा तो जब चाहे उसी समय विदेही हो
जायेंगे क्योंकि अन्त में सब अचानक होना है। तो अचानक के पेपर में यह विदेहीपन का
अभ्यास बहुत आवश्यक है।