27-12-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम्हारे दु:ख के दिन अब पूरे हुए, तुम अब ऐसी दुनिया में जा रहे हो जहाँ कोई भी अप्राप्त वस्तु नहीं''

प्रश्नः-
किन दो शब्दों का राज़ तुम्हारी बुद्धि में होने कारण पुरानी दुनिया से बेहद का वैराग्य रहता है?

उत्तर:-
उतरती कला और चढ़ती कला का राज़ तुम्हारी बुद्धि में है। तुम जानते हो आधाकल्प हम उतरते आये, अभी है चढ़ने का समय। बाप आये हैं नर से नारायण बनाने की सत्य नॉलेज देने। हमारे लिए अब कलियुग पूरा हुआ, नई दुनिया में जाना है इसलिए इससे बेहद का वैराग्य है।

गीत:-
धीरज धर मनुवा......

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से जो सम्पूर्ण पावन बनने की प्रतिज्ञा की है, इसे तोड़ना नहीं है। बहुत-बहुत परहेज रखनी है। अपना चार्ट देखना है - हमारे में कोई अवगुण तो नहीं है?

2) गॉडली युनिवर्सिटी में कभी भी अबसेन्ट नहीं होना है। सुखधाम का मालिक बनने की ऊंची पढ़ाई एक दिन भी मिस नहीं करनी है। मुरली रोज़ जरूर सुननी है।

वरदान:-
हर सेकण्ड हर संकल्प के महत्व को जान पुण्य की पूंजी जमा करने वाले पदमापदमपति भव

आप पुण्य आत्माओं के संकल्प में इतनी विशेष शक्ति है जिस शक्ति द्वारा असम्भव को सम्भव कर सकते हो। जैसे आजकल यत्रों द्वारा रेगिस्तान को हरा भरा कर देते हैं, पहाड़ियों पर फूल उगा देते हैं ऐसे आप अपने श्रेष्ठ संकल्पों द्वारा नाउम्मींदवार को उम्मींदवार बना सकते हो। सिर्फ हर सेकण्ड हर संकल्प की वैल्यु को जान, संकल्प और सेकण्ड को यूज कर पुण्य की पूंजी जमा करो। आपके संकल्प की शक्ति इतनी श्रेष्ठ है जो एक संकल्प भी पदमापदमपति बना देता है।

स्लोगन:-
हर कर्म अधिकारी पन के निश्चय और नशे से करो तो मेहनत समाप्त हो जायेगी।

अव्यक्त इशारे - अब सम्पन्न वा कर्मातीत बनने की धुन लगाओ

कर्मातीत स्थिति को पाने के लिए विशेष स्वयं में समेटने और समाने की शक्ति धारण करना आवश्यक है। कर्मबन्धनी आत्माएं जहाँ हैं वहाँ ही कार्य कर सकती हैं और कर्मातीत आत्मायें एक ही समय पर चारों ओर अपना सेवा का पार्ट बजा सकती हैं क्योंकि कर्मातीत हैं। उनकी स्पीड बहुत तीव्र होती है, सेकण्ड में जहाँ चाहे वहाँ पहुँच सकती है, तो इस अनुभूति को बढ़ाओ।