28-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - मोस्ट
बील्वेड शिवबाबा आये हैं तुम बच्चों को विश्व का मालिक बनाने, तुम उनकी श्रीमत पर
चलो''
प्रश्नः-
मनुष्य
परमात्मा के बारे में कौनसी दो बातें एक-दूसरे से भिन्न बोलते हैं?
उत्तर:-
एक ओर कहते -
परमात्मा अखण्ड ज्योति है और दूसरी ओर कहते वह तो नाम-रूप से न्यारा है। यह दोनों
बातें एक-दूसरे से भिन्न हो जाती हैं। यथार्थ रूप से न जानने कारण ही पतित बनते जाते
हैं। बाप जब आते हैं तो अपनी सही पहचान देते हैं।
गीत:-
मरना तेरी गली
में........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) फूलों के बगीचे में चलना है इसलिए खुशबूदार फूल बनना है। किसी को भी
दु:ख नहीं देना है। एक पारलौकिक बाप से सर्व संबंध जोड़ने हैं।
2) शिवबाबा प्यारे से प्यारा है उस एक को ही प्यार करना है। सुखदाता बाप को याद
करना है।
वरदान:-
किसी की कमी,
कमजोरी को न देख अपने गुण व शक्तियों का सहयोग देने वाले मास्टर दाता भव
मास्टर दाता वह है जो सदा
इसी रूहानी भावना में रहते कि सर्व रूहें हमारे समान वर्से के अधिकारी बन जायें।
किसी की भी कमी कमजोरी को न देख, वे अपने धारण किये हुए गुणों का, शक्तियों का
सहयोग देते हैं। यह ऐसा है ही - इस भावना के बजाए मैं इसको भी बाप समान बनाऊं, यह
शुभ भावना हो। साथ-साथ यही श्रेष्ठ कामना हो कि यह सर्व आत्मायें कंगाल, दु:खी,
अशान्त से सदा शान्त, सुख-रूप मालामाल बन जाएं - तब कहेंगे मास्टर दाता।
स्लोगन:-
मन्सा-वाचा-कर्मणा सेवा करने वाले ही निरन्तर सेवाधारी हैं, उनके हर श्वांस में सेवा
समाई हुई है।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
पहले अपनी देह से,
देह के सम्बन्ध से और पुरानी दुनिया की स्मृति से मुक्त बनो। जब इस मुक्ति की अवस्था
का अनुभव करेंगे तब मुक्त होने के बाद जीवन मुक्ति का अनुभव स्वत: होगा। तो चेक करो
जीवन में रहते हुए देह, देह के सम्बन्ध और पुरानी दुनिया की आकर्षण से कहाँ तक
मुक्त बने हैं?