28-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम बाप के पास आये हो अपनी ऊंच तकदीर बनाने, जितना श्रीमत पर चलेंगे उतना ऊंच तकदीर बनेगी''

प्रश्नः-
भक्ति की कौन सी आदत अभी तुम बच्चों में नहीं होनी चाहिए?

उत्तर:-
भक्ति में थोड़ा दु:ख होगा, बीमारी होगी तो कहेंगे हे राम, हे भगवान, हाय-हाय करने की आदत भक्ति में होती। अभी तुम्हें कभी भी मुख से ऐसे बोल नहीं निकालने हैं। तुम्हें तो अन्दर ही अन्दर मीठे बाबा को प्यार से याद करना है।

गीत:-
तकदीर जगाकर आई हूँ...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) पढ़ाई के आधार पर अपनी तकदीर ऊंच बनानी है, मनुष्य से देवता बनना है। पावन बनकर वापिस घर जाना है फिर नई दुनिया में आना है।

2) हाथों से काम करते - एक बाप की याद में रहना है। कोई भी उल्टी बात न सुननी है, न सुनानी है।

वरदान:-
सदा अपने पवित्र स्वरूप में स्थित रह गुण रूपी मोती चुगने वाले होलीहंस भव

आप होली हसों का स्वरूप है पवित्र और कर्तव्य है सदैव गुणों रूपी मोती चुगना। अवगुण रूपी कंकड कभी भी बुद्धि में स्वीकार न हो। लेकिन इस कर्तव्य को पालन करने के लिए सदैव एक आज्ञा याद रहे कि न बुरा सोचना है, न बुरा सुनना है, न बुरा देखना है, न बुरा बोलना है.... जो इस आज्ञा को सदा स्मृति में रखते हैं वह सदा सागर के किनारे पर रहते हैं। हंसों का ठिकाना है ही सागर।

स्लोगन:-
चलते-फिरते फरिश्ता स्वरूप में रहना - यही ब्रह्मा बाप की दिल-पसन्द गिफ्ट है।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

सदा अचल-अडोल रहने के लिए स्व-उन्नति और सेवा की उन्नति में सदा बिजी रहो, सर्व के प्रति शुभ भावना रखो। सम्बन्ध के आधार पर पार्ट नहीं, सेवा के सम्बन्ध से पार्ट बजाओ। दूसरा - विनाशी साधनों को सहारा वा आधार नहीं बनाओ। यह सब निमित्त मात्र हैं, सेवा के प्रति हैं। सेवा अर्थ कार्य में लगाया और न्यारे। साधनों की आकर्षण में मन आकर्षित नहीं होना चाहिए।