28-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“ मीठे बच्चे - तुम्हारी बिगड़ी को सुधारने वाला अर्थात् तकदीर बनाने वाला एक बाप है , जो तुम्हें नॉलेज देकर तकदीरवान बनाते हैं ''

प्रश्नः-
तुम बच्चों की इस रूहानी भट्ठी का एक कायदा कौन सा है?

उत्तर:-
रूहानी भट्ठी में अर्थात् याद की यात्रा में बैठने वालों को कभी भी इधर-उधर के ख्यालात नहीं चलाने हैं, एक बाप को याद करना है। अगर बुद्धि इधर-उधर भटकती है तो झुटका खाते रहेंगे, उबासी देंगे, इससे वायुमण्डल खराब होता है। अपना ही नुकसान करते हैं।

गीत:-
दिल का सहारा टूट न जाये...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सतयुग में ऊंच पद पाने के लिए मात-पिता को पूरा-पूरा फालो करना है। उनके समान पुरुषार्थ करना है। सेवा में तत्पर रहना है। एकाग्र हो पढ़ाई करनी है।

2) याद का सच्चा-सच्चा चार्ट रखना है। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है, देह वा देहधारियों को याद नहीं करना है।

वरदान:-
अपने हाइएस्ट पोजीशन में स्थित रहकर हर संकल्प , बोल और कर्म करने वाले सम्पूर्ण निर्विकारी भव

सम्पूर्ण निर्विकारी अर्थात् किसी भी परसेन्ट में कोई भी विकार तरफ आकर्षण न जाए, कभी उनके वशीभूत न हों। हाइएस्ट पोजीशन वाली आत्मायें कोई साधारण संकल्प भी नहीं कर सकती। तो जब कोई भी संकल्प वा कर्म करते हो तो चेक करो कि जैसा ऊंचा नाम वैसा ऊंचा काम है? अगर नाम ऊंचा, काम नीचा तो नाम बदनाम करते हो इसलिए लक्ष्य प्रमाण लक्षण धारण करो तब कहेंगे सम्पूर्ण निर्विकारी अर्थात् होलीएस्ट आत्मा।

स्लोगन:-
कर्म करते करन-करावनहार बाप की स्मृति रहे तो स्व-पुरुषार्थ और योग का बैलेन्स ठीक रहेगा।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

इस कलियुगी तमोप्रधान जड़जड़ीभूत वृक्ष की दुर्दशा देखते हुए ब्रह्मा बाप को संकल्प आता है कि अभी-अभी बच्चों के तपस्वी रूप द्वारा, योग अग्नि द्वारा इस पुराने वृक्ष को भस्म कर दें। परन्तु इसके लिए संगठित रूप में फुलफोर्स से योग ज्वाला प्रज्जवलित चाहिए। तो ब्रह्मा बाप के इस संकल्प को साकार में लाओ।