28-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - यह
भूल-भुलैया का खेल है, तुम घड़ी-घड़ी बाप को भूल जाते हो, निश्चयबुद्धि बनो तो इस
खेल में फसेंगे नहीं''
प्रश्नः-
कयामत के समय
को देखते हुए तुम बच्चों का कर्तव्य क्या है?
उत्तर:-
तुम्हारा
कर्तव्य है - अपनी पढ़ाई में अच्छी रीति लग जाना, और बातों में नहीं जाना है। बाप
तुम्हें नयनों पर बिठाकर, गले का हार बनाकर साथ ले जायेंगे। बाकी तो सबको अपना-अपना
हिसाब-किताब चुक्तू करके जाना ही है। बाप आये हैं सबको अपने साथ घर ले जाने।
गीत:-
दूर देश का
रहने वाला........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) याद की यात्रा में रहकर सच्ची-सच्ची दीपावली रोज मनानी है। अपना नया
खाता 21 जन्मों के लिए जमा करना है।
2) ड्रामा के राज़ को बुद्धि में रख पढ़ाई के सिवाए और किसी भी बात में नहीं जाना
है। सब हिसाब-किताब चुक्तू करने हैं।
वरदान:-
रूहानियत की
स्थिति द्वारा व्यर्थ बातों का स्टॉक खत्म करने वाले खुशी के खजाने से सम्पन्न भव
रूहानियत की स्थिति द्वारा
व्यर्थ बातों के स्टॉक को समाप्त करो, नहीं तो एक दो के अवगुणों का वर्णन करते
बीमारी के जर्मस वायुमण्डल में फैलाते रहेंगे, इससे वातावरण पावरफुल नहीं बनेगा।
आपके पास अनेक भावों से अनेक आत्मायें आयेंगी लेकिन आपकी तरफ से शुभ भावना की बातें
ही ले जाएं। यह तब होगा जब स्वयं के पास खुशी की बातों का स्टॉक जमा होगा। यदि दिल
में किसी के प्रति कोई व्यर्थ बातें होगी तो जहाँ बातें हैं वहाँ बाप नहीं, पाप है।
स्लोगन:-
स्मृति
का स्विच आन हो तो मूड ऑफ हो नहीं सकती।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
जितना जो बिजी है,
उतना ही उसको बीच-बीच में यह अभ्यास करना जरूरी है, फिर सेवा में जो कभी-कभी थकावट
होती है, कभी कुछ न कुछ आपस में हलचल हो जाती है, वह नहीं होगा। एक सेकण्ड में
न्यारे होने का अभ्यास होगा तो कोई भी बात हुई एक सेकण्ड में अपने अभ्यास से इन बातों
से दूर हो जायेंगे। सोचा और हुआ। युद्ध नहीं करनी पड़ेगी।