29-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अपने स्वीट बाप को याद करो तो तुम सतोप्रधान देवता बन जायेंगे, सारा मदार याद की यात्रा पर है''

प्रश्नः-
जैसे बाप की कशिश बच्चों को होती है वैसे किन बच्चों की कशिश सबको होगी?

उत्तर:-
जो फूल बने हैं। जैसे छोटे बच्चे फूल होते हैं, उन्हें विकारों का पता भी नहीं तो वह सबको कशिश करते हैं ना। ऐसे तुम बच्चे भी जब फूल अर्थात् पवित्र बन जायेंगे तो सबको कशिश होगी। तुम्हारे में विकारों का कोई भी कांटा नहीं होना चाहिए।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सुखधाम में चलने के लिए सुखदाई बनना है। सबके दु:ख हरकर सुख देना है। कभी भी दु:खदाई कांटा नहीं बनना है।

2) इस विनाशी शरीर में आत्मा ही मोस्ट वैल्युबुल है, वही अमर अविनाशी है इसलिए अविनाशी चीज़ से प्यार रखना है। देह का भान मिटा देना है।

वरदान:-
अपने अनादि आदि स्वरुप की स्मृति से निर्बन्धन बनने और बनाने वाले मरजीवा भव

जैसे बाप लोन लेता है, बंधन में नहीं आता, ऐसे आप मरजीवा जन्म वाले बच्चे शरीर के, संस्कारों के, स्वभाव के बंधनों से मुक्त बनो, जब चाहें जैसे चाहें वैसे संस्कार अपने बना लो। जैसे बाप निर्बन्धन है ऐसे निर्बन्धन बनो। मूलवतन की स्थिति में स्थित होकर फिर नीचे आओ। अपने अनादि आदि स्वरुप की स्मृति में रहो, अवतरित हुई आत्मा समझकर कर्म करो तो और भी आपको फालो करेंगे।

स्लोगन:-
याद की वृत्ति से वायुमण्डल को पावरफुल बनाना - यही मन्सा सेवा है।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

जब तक किसी भी प्रकार का लगाव है, चाहे वह संकल्प के रूप में हो, चाहे सम्बन्ध के रूप में, चाहे सम्पर्क के रूप में, चाहे अपनी कोई विशेषता की तरफ हो। कोई भी लगाव बन्धन-युक्त कर देगा। वह लगाव अशरीरी बनने नहीं देगा और वह विश्व-कल्याणकारी भी बना नहीं सकेगा इसलिए पहले स्वयं लगाव मुक्त बनो तब विश्व को मुक्ति व जीवनमुक्ति का वर्सा दिला सकेंगे।