29-11-2025        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम सच्चे-सच्चे राजऋषि हो, तुम्हारा कर्तव्य है तपस्या करना, तपस्या से ही पूजन लायक बनेंगे''

प्रश्नः-
कौन-सा पुरुषार्थ सदाकाल के लिए पूजने लायक बना देता है?

उत्तर:-
आत्मा की ज्योति जगाने वा तमोप्रधान आत्मा को सतोप्रधान बनाने का पुरुषार्थ करो तो सदाकाल के लिए पूजन लायक बन जायेंगे। जो अभी ग़फलत करते हैं वह बहुत रोते हैं। अगर पुरुषार्थ करके पास नहीं हुए, धर्मराज की सज़ायें खाई तो सज़ा खाने वाले पूजे नहीं जायेंगे। सज़ा खाने वाले का मुँह ऊंचा नहीं हो सकता।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) जैसे बाप सदा बच्चों के प्रति सुखदाई है, ऐसे सुखदाई बनना है। सबको मुक्ति-जीवनमुक्ति का रास्ता बताना है।

2) देही-अभिमानी बनने की तपस्या करनी है। इस पुरानी छी-छी दुनिया से बेहद का वैरागी बनना है।

वरदान:-
हर एक की विशेषता को स्मृति में रखते हुए फेथफुल बन एकमत संगठन बनाने वाले सर्व के शुभचिंतक भव

ड्रामा अनुसार हर एक को कोई न कोई विशेषता अवश्य प्राप्त है, उस विशेषता को कार्य में लगाओ तथा औरों की विशेषता को देखो। एक दो में फेथफुल रहो तो उनकी बातों का भाव बदल जायेगा। जब हर एक की विशेषता को देखेंगे तो अनेक होते भी एक दिखाई देंगे। एकमत संगठन हो जायेगा। कोई किसके ग्लानी की बात सुनाये तो उसे टेका देने के बजाए सुनाने वाले का रूप परिवर्तन कर दो, तब कहेंगे शुभचिंतक।

स्लोगन:-
श्रेष्ठ संकल्प का खजाना ही श्रेष्ठ प्रालब्ध वा ब्राह्मण जीवन का आधार है।

अव्यक्त इशारे - अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ

अगर सेकण्ड में विदेही बनने का अभ्यास नहीं होगा तो लास्ट घड़ी भी युद्ध में ही जायेगी और जिस बात में कमजोर होंगे, चाहे स्वभाव में, चाहे सम्बन्ध में आने में, चाहे संकल्प शक्ति में, वृत्ति में, वायुमण्डल के प्रभाव में, जिस बात में कमजोर होंगे, उसी रूप में जानबूझकर भी माया लास्ट पेपर लेगी इसीलिए विदेही बनने का अभ्यास बहुत जरूरी है।