30-11-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 18.01.2008 "बापदादा" मधुबन
सच्चे स्नेही बन, सब
बोझ बाप को देकर मौज का अनुभव करो, मेहनत मुक्त बनो
वरदान:-
याद के जादू
मन्त्र द्वारा सर्व सिद्धियां प्राप्त करने वाले सिद्धि स्वरूप भव
बाप की याद ही जादू
का मन्त्र है, इस जादू के मन्त्र द्वारा जो सिद्धि चाहो वह प्राप्त कर सकते हो। जैसे
स्थूल में भी किसी कार्य की सद्धि के लिए मन्त्र जपते हैं, ऐसे यहाँ भी अगर किसी
कार्य में सिद्धि चाहिए तो यह याद का महामन्त्र ही विधि स्वरूप है। यह जादू मन्त्र
सेकण्ड में परिवर्तन कर देता है। इसे सदा स्मृति में रखो तो सदा सिद्धि स्वरूप बन
जायेंगे क्योंकि याद में रहना बड़ी बात नहीं है, सदा याद में रहना - यही बड़ी बात
है, इसी से सर्व सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
स्लोगन:-
सेकण्ड में विस्तार को सार रूप में समा लेना अर्थात् अन्तिम सर्टीफिकेट लेना।
अव्यक्त इशारे -
अशरीरी व विदेही स्थिति का अभ्यास बढ़ाओ
जैसे कोई शरीर के
वस्त्र सहज उतार सकते हो ऐसे यह शरीर रूपी वस्त्र भी सहज उतार सको और सहज ही समय पर
धारण कर सको, इसका अभ्यास चाहिए। अगर वस्त्र तंग वा टाइट है तो सहज उतार नहीं सकते,
ऐसे यह देह रूपी वस्त्र भी किसी संस्कार में चिपका हुआ तंग वा टाइट न हो। इसके लिए
सभी बातों में इजी रहो, यदि इज़ी रहेंगे तो सभी कार्य इज़ी होंगे। जितना पुराने
संस्कारों से न्यारा रहेंगे उतना अवस्था भी न्यारी अर्थात् विदेही सहज बन जायेगी।