30-12-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - पापों से
हल्का होने के लिए व़फादार, ऑनेस्ट बन अपनी कर्म कहानी बाप को लिखकर दो तो क्षमा हो
जायेगी''
प्रश्नः-
संगमयुग पर
तुम बच्चे कौन-सा बीज नहीं बो सकते हो?
उत्तर:-
देह-अभिमान
का। इस बीज से सब विकारों के झाड़ निकल पड़ते हैं। इस समय सारी दुनिया में 5 विकारों
के झाड़ निकले हुए हैं। सब काम-क्रोध के बीज बोते रहते हैं। तुम्हें बाप का
डायरेक्शन है बच्चे योगबल से पावन बनो। यह बीज बोना बन्द करो।
गीत:-
तुम्हें पा के
हमने जहाँ पा लिया है.....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सदा स्मृति रहे कि हम अभी ब्राह्मण हैं इसलिए विकारों से बहुत-बहुत
दूर रहना है। कभी भी क्रिमिनल एसाल्ट न हो। बाप से बहुत-बहुत ऑनेस्ट, वफादार रहना
है।
2) डबल सिरताज देवता बनने के लिए बहुत मीठा बनना है, लाइन क्लीयर रखनी है।
राजयोग की तपस्या करनी है।
वरदान:-
सदा बेहद की
स्थिति में स्थित रहने वाले बन्धनमुक्त, जीवनमुक्त भव
देह-अभिमान हद की स्थिति
है और देही अभिमानी बनना - यह है बेहद की स्थिति। देह में आने से अनेक कर्म के
बन्धनों में, हद में आना पड़ता है लेकिन जब देही बन जाते हो तो ये सब बन्धन खत्म हो
जाते हैं। जैसे कहा जाता बन्धनमुक्त ही जीवनमुक्त है, ऐसे जो बेहद की स्थिति में
स्थित रहते हैं वह दुनिया के वायुमण्डल, वायब्रेशन, तमोगुणी वृत्तियां, माया के वार
इन सबसे मुक्त हो जाते हैं इसको ही कहा जाता है जीवनमुक्त स्थिति, जिसका अनुभव
संगमयुग पर ही करना है।
स्लोगन:-
निश्चयबुद्धि की निशानी निश्चित विजयी और निश्चिंत, उनके पास व्यर्थ आ नहीं सकता।
अव्यक्त इशारे -
अब सम्पन्न वा कर्मातीत बनने की धुन लगाओ
कर्मो की गुह्य गति
को जानकर अर्थात् त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म करो तब ही कर्मातीत बन सकेंगे। यदि
छोटी-छोटी गलतियां संकल्प रुप में भी हो जाती हैं तो उसका भी हिसाब-किताब बहुत कड़ा
बनता है इसलिए छोटी गलती भी बड़ी समझनी है क्योंकि अभी सम्पूर्ण स्थिति के समीप आ
रहे हो।