31-01-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम यहाँ आये हो सर्वशक्तिमान् बाप से शक्ति लेने अर्थात् दीपक में ज्ञान का घृत डालने''

प्रश्नः-
शिव की बरात का गायन क्यों है?

उत्तर:-
क्योंकि शिवबाबा जब वापिस जाते हैं तो सभी आत्माओं का झुण्ड उनके पीछे-पीछे भागकर जाता है। मूलवतन में भी आत्माओं का मनारा (छत्ता) लग जाता है। तुम पवित्र बनने वाले बच्चे बाप के साथ-साथ जाते हो। साथ के कारण ही बरात का गायन है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) मन-वचन-कर्म से पवित्र बन आत्मा रूपी बैटरी को चार्ज करना है। पक्का ब्राह्मण बनना है।

2) मनमत वा मनुष्य मत छोड़ एक बाप की श्रीमत पर चलकर स्वयं को श्रेष्ठ बनाना है। सतोप्रधान बन बाप के साथ उड़कर जाना है।

वरदान:-
सत्यता की शक्ति द्वारा प्रकृति वा विश्व को सतोप्रधान बनाने वाले मास्टर विधि-विधाता भव

जब आप बच्चे सत्यता की शक्ति को धारण कर मास्टर विधि विधाता बनते हो तो प्रकृति सतोप्रधान बन जाती है, युग सतयुग बन जाता है। सर्व आत्मायें सद्गति की तकदीर बना लेती है। आपकी सत्यता पारस के समान है। जैसे पारस लोहे को पारस बना देता है, ऐसे सत्यता की शक्ति आत्मा को, प्रकृति को, समय को, सर्व सामग्री को, सर्व सम्बन्ध को, संस्कारों को, आहार-व्यवहार को सतोप्रधान बना देती है।

स्लोगन:-
योगी आत्मायें वह हैं जिन्हें प्रकृति की हलचल भी आकर्षित न करे।

अव्यक्त इशारे - इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो

स्वदर्शन चक्रधारी सो छत्रधारी बनो तो देह की स्मृति के अनेक व्यर्थ संकल्पों के चक्र से, लौकिक और अलौकिक सम्बन्धों के चक्र से, अपने अनेक जन्मों के स्वभाव और संस्कारों के चक्र से और प्रकृति के अनेक प्रकार की आकर्षण के चक्र से जब मुक्त हो जायेंगे तब अन्य आत्माओं को भी बाप से प्राप्त हुई शक्तियों द्वारा अनेक चक्करों से सहज ही छुड़ाकर जीवन-मुक्त बना सकेंगे।