31-12-2025 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - मधुबन
होलीएस्ट ऑफ दी होली बाप का घर है, यहाँ तुम किसी भी पतित को नहीं ला सकते''
प्रश्नः-
इस ईश्वरीय
मिशन में जो पक्के निश्चय बुद्धि हैं उनकी निशानियां क्या होंगी?
उत्तर:-
1- वे
स्तुति-निंदा... सबमें धीरज से काम लेंगे, 2. क्रोध नहीं करेंगे, 3. किसी को भी
दैहिक दृष्टि से नहीं देखेंगे। आत्मा को ही देखेंगे, आत्मा होकर बात करेंगे, 4.
स्त्री-पुरुष साथ में रहते कमल फूल समान रहेंगे, 5. किसी भी प्रकार की तमन्ना (इच्छा)
नहीं रखेंगे।
गीत:-
जले न क्यों
परवाना........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) जो बात काम की नहीं है, उसे एक कान से सुन दूसरे से निकाल देना है,
हियर नो ईविल...... बाप जो शिक्षायें देता है उसे धारण करना है।
2) कोई भी हद की तमन्नायें नहीं रखनी है। आंखों की बड़ी सम्भाल रखनी है।
क्रिमिनल दृष्टि न जाए। कोई भी कर्मेन्द्रिय चलायमान न हो। खुशी से भरपूर रहना है।
वरदान:-
माया के खेल
को साक्षी होकर देखने वाले सदा निर्भय, मायाजीत भव
समय प्रति समय जैसे आप
बच्चों की स्टेज आगे बढ़ती जा रही है, ऐसे अब माया का वार नहीं होना चाहिए, माया
नमस्कार करने आये वार करने नहीं। यदि माया आ भी जाए तो उसे खेल समझकर देखो। ऐसे
अनुभव हो जैसे साक्षी होकर हद का ड्रामा देखते हैं। माया का कैसा भी विकराल रूप हो
आप उसे खिलौना और खेल समझकर देखेंगे तो बहुत मजा आयेगा, फिर उससे डरेंगे वा
घबरायेंगे नहीं। जो बच्चे सदा खिलाड़ी बनकर साक्षी हो माया का खेल देखते हैं वह सदा
निर्भय वा मायाजीत बन जाते हैं।
स्लोगन:-
ऐसा
स्नेह का सागर बनो जो क्रोध समीप भी न आ सके।
अव्यक्त इशारे -
अब सम्पन्न वा कर्मातीत बनने की धुन लगाओ
कर्मातीत अर्थात्
कर्म के अधीन नहीं, कर्मो के परतन्त्र नहीं। स्वतन्त्र हो कर्मेन्द्रियों द्वारा
कर्म कराओ। जो गायन है कि करते हुए अकर्ता, सम्पर्क-सम्बन्ध में रहते हुए कर्मातीत,
क्या ऐसी स्टेज रहती है? कोई भी लगाव न हो और सर्विस भी लगाव से न हो लेकिन निमित्त
भाव से हो; इससे सहज ही कर्मातीत बन जायेंगे।