02-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम विकारों का दान दे दो तो राहू का ग्रहण
उतर जायेगा, दे दान तो छूटे ग्रहण''
प्रश्नः-
वृक्षपति बाप
अपने भारतवासी बच्चों पर बृहस्पति की दशा बिठाने के लिए कौन सी स्मृति दिलाते हैं?
उत्तर:-
हे भारतवासी
बच्चों, तुम्हारा आदि सनातन देवी-देवता धर्म अति श्रेष्ठ था। तुम सर्वगुण सम्पन्न,
16 कला सम्पूर्ण थे। तुम मुझ सागर के बच्चे काम चिता पर बैठ काले हो गये हो, ग्रहण
लग गया है। अब मैं तुम्हें फिर से गोरा बनाने आया हूँ, यह स्मृति आने से बृह्स्पति
की दशा बैठ जाती है।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस कांटों की दुनिया से फूलों के बगीचे में जाने के लिए जो भी कांटे (विकार) हैं,
उन्हें निकाल देना है। पारस बनाने वाले बाप को बड़े प्यार से याद करना है।
2) इस कल्याणकारी
संगमयुग पर शूद्र से ब्राह्मण सो देवता बनने का पुरुषार्थ करना है। राहू के ग्रहण
को उतारने के लिए विकारों का दान देना है।
वरदान:-
संगमयुग पर हर
कर्म कला के रूप में करने वाले 16 कला सम्पन्न भव
संगमयुग विशेष कर्म
रूपी कला दिखाने का युग है। जिनका हर कर्म कला के रूप में होता है उनके हर कर्म का
वा गुणों का गायन होता है। 16 कला सम्पन्न अर्थात् हर चलन सम्पूर्ण कला के रूप में
दिखाई दे - यही सम्पूर्ण स्टेज की निशानी है। जैसे साकार के बोलने, चलने ...सभी में
विशेषता देखी, तो यह कला हुई। उठने बैठने की कला, देखने की कला, चलने की कला थी। सभी
में न्यारापन और विशेषता थी। तो ऐसे फालो फादर कर 16 कला सम्पन्न बनो।
स्लोगन:-
पावरफुल वह है
जो फौरन परखकर फैंसला कर दे।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
आप बच्चों का योग जब
ज्वाला स्वरूप शक्तिशाली होगा तब पवित्रता की अग्नि सेकण्ड में विश्व के किचड़े को
भस्म कर सकेगी। पवित्रता की यह शक्ति महान शक्ति है। अन्त में जब आप सम्पूर्ण
पवित्र हो जायेंगे तब आपके श्रेष्ठ संकल्प के लगन की अग्नि से यह सब किचड़ा भस्म हो
जायेगा।