02-11-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम यहाँ अपनी राजाई तकदीर बनाने आये हो, जितना याद में रहेंगे, पढ़ाई पर ध्यान देंगे उतना तकदीर श्रेष्ठ बनती जायेगी''

प्रश्नः-
संगम पर किस श्रीमत का पालन कर 21 जन्मों के लिए तुम अपनी तकदीर श्रेष्ठ बना लेते हो?

उत्तर:-
संगम पर बाप की श्रीमत है - मीठे बच्चे निर्विकारी बनो। देही-अभिमानी बनने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करो। कभी कोई पाप कर्म नहीं करना तो 21 जन्मों के लिए तकदीर श्रेष्ठ बन जायेगी।

गीत:-
तकदीर जगाकर आई हूँ...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) मनुष्य से देवता बनने के लिए जो भी आसुरी स्वभाव है, झूठ बोलने की आदत है, उसका त्याग करना है। दैवी स्वभाव धारण करना है।

2) घर चलने के लिए पवित्र जरूर बनना है। माया के तूफान आते भी कर्मेन्द्रियों से कभी कोई विकर्म नहीं करना है।

वरदान:-
अधिकारी पन की स्थिति द्वारा बाप को अपना साथी बनाने वाले सदा विजयी भव

बाप को साथी बनाने का सहज तरीका है - अधिकारी पन की स्थिति। जब अधिकारी पन की स्थिति में स्थित रहते हो तब व्यर्थ संकल्प वा अशुद्ध संकल्पों की हलचल में वा अनेक रसों में बुद्धि डगमग नहीं होती। बुद्धि की एकाग्रता द्वारा सामना करने, परखने व निर्णय करने की शक्ति आ जाती है, जो सहज ही माया के अनेक प्रकार के वार से विजयी बना देती है।

स्लोगन:-
राजयोगी वह हैं जो सेकण्ड में सार से विस्तार और विस्तार से सार में जाने के अभ्यासी हैं।

ये अव्यक्त इशारे - ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण स्थिति का अनुभव करो

ब्रह्मा बाप ने सम्पूर्ण बनने के लिए अपने सर्व खजाने आदि से अन्तिम दिन तक सफल किये, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखा - सम्पूर्ण फरिश्ता बन गये। तो लक्ष्य रखो मुझे बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना ही है। कुछ भी पुरुषार्थ करना पड़े लेकिन निश्चित है कि बाप समान बनना ही है।