03-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम रूप
बसन्त हो, तुम्हारे मुख से सदैव ज्ञान रत्न ही निकलने चाहिए, जब भी नया कोई आये तो
उसे बाप की पहचान दो''
प्रश्नः-
अपनी अवस्था
को एकरस बनाने का साधन कौन सा है?
उत्तर:-
संग की सम्भाल
करो तो अवस्था एकरस बनती जायेगी। हमेशा अच्छे सर्विसएबुल स्टूडेण्ट का संग करना
चाहिए। अगर कोई ज्ञान और योग के सिवाए उल्टी बातें करते हैं, मुख से रत्नों के बदले
पत्थर निकालते हैं तो उनके संग से हमेशा सावधान रहना चाहिए।
गीत:-
रात के राही...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सेन्सीबुल बन सबको बाप का परिचय देना है। मुख से कभी पत्थर निकाल
डिससर्विस नहीं करनी है। ज्ञान-योग के सिवाए दूसरी कोई चर्चा नहीं करनी है।
2) जो रूप-बसन्त हैं, सर्विसएबुल हैं उनका ही संग करना है। जो उल्टी-सुल्टी बातें
सुनायें उनका संग नहीं करना है।
वरदान:-
नॉलेज द्वारा
रावण के बहु रूपों को जानकर उसकी अट्रैक्शन से मुक्त रहने वाले हिम्मतवान भव
जो बच्चे नॉलेज द्वारा
रावण के बहु रूपों को अच्छी तरह से जान गये हैं, उनके आगे वह नजदीक भी नहीं आ सकता।
चाहे सोने का, चाहे हीरे का रूप धारण करे लेकिन उसकी अट्रैक्शन में नहीं आयेंगे। ऐसी
सच्ची सीतायें बन लकीर के अन्दर रहने का लक्ष्य रख, हिम्मतवान बनो। फिर यह रावण की
बहु सेना वार करने के बजाए आपकी सहयोगी बन जायेगी। प्रकृति के 5 तत्व और 5 विकार
ट्रांसफर होकर आपकी सेवा के लिए आयेंगे।
स्लोगन:-
सेवाओं
में सफलता प्राप्त करना है तो निर्माणचित की विशेषता को धारण करो।
ये अव्यक्त इशारे
- “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
विजयी बनने का
फाउन्डेशन है “निश्चय'', फाउन्डेशन अगर पक्का है तो बिल्डिंग हिल नहीं सकती,
निश्चिंत रहते हैं। अगर फाउन्डेशन कच्चा है तो थोड़ा-सा भी तूफान आयेगा, थोड़ी भी
धरनी हिलेगी तो भय होगा कि यह बिल्डिंग हमारी गिर नहीं जाए या क्रेक (दरार) नहीं हो
जाए। लेकिन निश्चय का फाउन्डेशन पक्का होगा तो निर्भय और निश्चिंत रहेंगे।