03-11-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप द्वारा जो नॉलेज मिली है वह बुद्धि में कायम रखनी है, सवेरे-सवेरे उठ स्वदर्शन चक्रधारी बन विचार सागर मंथन करना है''

प्रश्नः-
इस ईश्वरीय पढ़ाई का लॉ (कायदा) कौन सा है? उसके लिए कौन सा डायरेक्शन मिला हुआ है?

उत्तर:-
इस ईश्वरीय पढ़ाई का लॉ है - नियमित पढ़ना। कभी पढ़ना, कभी न पढ़ना यह लॉ नहीं है। बाबा ने पढ़ाई के लिए बहुत प्रबन्ध दिये हैं। पढ़ाई (मुरली) यहाँ से पोस्ट में जाती है। 7 दिन का कोर्स लेकर कहाँ भी पढ़ सकते हो। पढ़ाई कभी मिस नहीं करनी है।

गीत:-
ओम् नमो शिवाए.....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सर्वोत्तम कुल की स्मृति से गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान पवित्र बनना है। कभी भी सद्गुरू की निंदा नहीं करानी है।

2) श्रीमत पर भारत को स्वर्ग बनाने की सेवा करनी है। स्वदर्शन चक्रधारी बनना और बनाना है। जब भी फुर्सत मिले तो विचार सागर मंथन जरूर करना है।

वरदान:-
सदा कल्याणकारी भावना द्वारा गुणग्राही बनने वाले अचल अडोल भव

अपनी स्थिति अचल अडोल बनाने के लिए सदा गुणग्राही बनो। अगर हर बात में गुणग्राही होंगे तो हलचल में नहीं आयेंगे। गुणग्राही अर्थात् कल्याण की भावना। अवगुण में गुण देखना इसको कहते हैं गुणग्राही इसलिए अवगुण वाले से भी गुण उठाओ। जैसे वह अवगुण में दृढ़ है ऐसे आप गुण में दृढ़ रहो। गुण का ग्राहक बनो, अवगुण का नहीं।

स्लोगन:-
अपना सब कुछ बाप को अर्पण कर सदा हल्के रहने वाले ही फरिश्ते हैं।

ये अव्यक्त इशारे - ब्रह्मा बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण स्थिति का अनुभव करो

बाप समान बनने के लिए ब्रहमा बाप को फालो करते चलो। सोचो, ब्रह्मा बाप सम्पूर्ण कैसे बने? उनकी क्या विशेषता रही? सम्पूर्णता का विशेष आधार क्या रहा? ब्रह्मा बाप ने अपना हर समय सफल किया। श्वांस-श्वांस, सेकण्ड-सेकण्ड सफल किया। तो बाप समान बनने के लिए लक्ष्य रखो कि सफल करना है और सफलतामूर्त बनना है।