04-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हारा
धन्धा है मनुष्यों को सुजाग करना, रास्ता बताना, जितना तुम देही-अभिमानी बनकर बाप
का परिचय सुनायेंगे उतना कल्याण होगा''
प्रश्नः-
गरीब बच्चे
अपनी किस विशेषता के आधार पर साहूकारों से आगे जाते हैं?
उत्तर:-
गरीबों में
दान पुण्य की बहुत श्रद्धा रहती है। गरीब भक्ति भी लगन से करते हैं। साक्षात्कार भी
गरीबों को होता है। साहूकारों को अपने धन का नशा रहता। पाप जास्ती होते इसलिए गरीब
बच्चे उनसे आगे चले जाते हैं।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए........
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) देह-अभिमान में आकर किसी भी प्रकार का फैशन नहीं करना है। जास्ती शौक
नहीं रखने हैं। बहुत-बहुत साधारण होकर चलना है।
2) आपस में बहुत-बहुत रूहानी स्नेह से चलना है, कभी भी लूनपानी नहीं होना है।
बाबा का सपूत बच्चा बनना है। अहंकार में कभी नहीं आना है।
वरदान:-
अपने भाग्य और
भाग्य विधाता के गुण गाने वाले सदा प्रसन्नचित भव
सभी ब्राह्मण बच्चों को
जन्म से ही ताज, तख्त, तिलक जन्म सिद्ध अधिकार के रूप में प्राप्त होता है। तो इस
भाग्य के चमकते हुए सितारे को देखते हुए अपने भाग्य और भाग्य विधाता के गुण गाते रहो
तो गुण सम्पन्न बन जायेंगे। अपनी कमजोरियों के गुण नहीं गाओ, भाग्य के गुण गाते रहो,
प्रश्नों से पार रहो तब सदा प्रसन्न-चित रहने का वरदान प्राप्त होगा। फिर दूसरों को
भी सहज ही प्रसन्न कर सकेंगे।
स्लोगन:-
एकनामी
और इकॉनामी से चलना ही ब्राह्मण जीवन में सफलता का आधार है।
ये अव्यक्त इशारे
- “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
निश्चय सदा ही
निश्चिंत बनाता है और जो निश्चिंत स्थिति में रहकर कोई भी कार्य करता है वह उसमें
सफल जरूर होता है क्योंकि निश्चिंत स्थिति में बुद्धि यथार्थ जजमेंट करती है।
यथार्थ निर्णय का आधार है - निश्चयबुद्धि, निश्चिंत स्थिति, उसमें सोचने की भी
आवश्यकता नहीं है।