04-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप के राइट हैण्ड बनना है तो हर बात में
राइटियस बनो, सदा श्रेष्ठ कर्म करो''
प्रश्नः-
कौन सा
संस्कार सेवा में बहुत विघ्न डालता है?
उत्तर:-
भाव-स्वभाव के
कारण आपस में जो द्वेत मत के संस्कार हो जाते हैं, वह सेवा में बहुत विघ्न डालते
हैं। दो मतों से बहुत नुकसान होता है। क्रोध का भूत ऐसा है जो भगवान का भी सामना
करने में देरी न करे इसलिए बाबा कहते हैं मीठे बच्चे, ऐसा कोई भी संस्कार हो तो उसे
निकाल दो।
गीत:-
तकदीर जगाकर
आई हूँ...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
जैसे बाप दु:ख हर्ता सुख कर्ता है, ऐसे बाप समान बनना है। बहुत मीठा बनना है। सदा
शुभ काम करके राइट हैण्ड बन जाना है।
2) कभी दो मतें नहीं
बनानी है। भाव-स्वभाव में आकर एक-दो का सामना नहीं करना है। क्रोध का भूत निकाल देना
है।
वरदान:-
स्वयं की
स्मृति में रह अपने हर कर्म को संयम (नियम) बनाने वाले अथॉरिटी स्वरूप भव
जैसे साकार में स्वयं
की स्मृति में रहने से जो कर्म किया वही ब्राह्मण परिवार का संयम बन गया। स्वयं के
नशे में रहने के कारण अथॉरिटी से कह सकते थे कि अगर साकार द्वारा कोई उल्टा कर्म भी
हो गया तो सुल्टा कर देंगे। स्वयं के स्वरूप की स्मृति में रहने से यह नशा रहता है
कि कोई कर्म उल्टा हो ही नहीं सकता। आप बच्चे भी जब स्वयं की स्थिति में स्थित रहो
तो जो संकल्प चलेगा, जो बोल बोलेंगे वा कर्म करेंगे, वही संयम (नियम) बन जायेगा।
स्लोगन:-
पवित्रता का
पिल्लर मजबूत करो तो यह पिल्लर लाइट हाउस का काम करता रहेगा।
ये अव्यक्त इशारे -
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो“
अगर बुद्धि में
अशुद्ध संकल्प वा पुराने संस्कार संकल्प रूप में भी टच होते हैं तो सम्पूर्ण वैष्णव
नहीं कहेंगे। जैसे कोई अकर्तव्य कार्य देखता भी है तो देखने का असर हो जाता है, उसका
भी हिसाब बन जाता है। इस हिसाब से सोचो तो पुराने संस्कार व अशुद्ध संकल्प बुद्धि
में अगर टच होते हैं तो भी सम्पूर्ण वैष्णव वा सम्पूर्ण पवित्र कैसे कहेंगे।