05-03-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप को ज्ञानी तू आत्मा बच्चे ही प्रिय हैं इसलिए बाप समान मास्टर ज्ञान सागर बनो''

प्रश्नः-
कल्याणकारी युग में बाप सभी बच्चों को कौन सी स्मृति दिलाते हैं?

उत्तर:-
बच्चे तुम्हें अपना घर छोड़े 5 हज़ार वर्ष हुए हैं। तुमने 5 हज़ार वर्ष में 84 जन्म लिए, अब यह अन्तिम जन्म है, वानप्रस्थ अवस्था है इसलिए अब घर जाने की तैयारी करो फिर सुखधाम में आयेंगे। भल गृहस्थ व्यवहार में रहो लेकिन इस अन्तिम जन्म में पवित्र बन बाप को याद करो।

गीत:-
महफिल में जल उठी शमा........

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) योग अग्नि से विकर्मों की खाद को भस्म कर पावन बनना है। अब वानप्रस्थ अवस्था है इसलिए वापिस घर जाने के लिए सम्पूर्ण सतोप्रधान बनना है।

2) इस कल्याणकारी युग में बाप समान दु:ख हर्ता सुख कर्ता बनना है।

वरदान:-
सदा कम्बाइण्ड स्वरूप की स्मृति द्वारा मुश्किल कार्य को सहज बनाने वाले डबल लाइट भव

जो बच्चे निरन्तर याद में रहते हैं वे सदा साथ का अनुभव करते हैं। उनके सामने कोई भी समस्या आयेगी तो अपने को कम्बाइंड अनुभव करेंगे, घबरायेंगे नहीं। ये कम्बाइण्ड स्वरूप की स्मृति कोई भी मुश्किल कार्य को सहज बना देती है। कभी कोई बड़ी बात सामने आये तो अपना बोझ बाप के ऊपर रख स्वयं डबल लाइट हो जाओ। तो फरिश्ते समान दिन-रात खुशी में मन से डांस करते रहेंगे।

स्लोगन:-
किसी भी कारण का निवारण कर सन्तुष्ट रहने और करने वाले ही सन्तुष्टमणि हैं।

ये अव्यक्त इशारे - “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"

श्रीमत प्रमाण हर कदम हो तो सदा निश्चिंत रहेंगे और निश्चिंत हैं तो सदा यथार्थ निर्णय देंगे। जब निर्णय यथार्थ होगा तो विजयी होंगे। त्रिकालदर्शी आत्मा सदा ही निश्चिंत रहती है क्योंकि उसे निश्चय है कि हमारी विजय हुई ही पड़ी है।