05-08-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम अपने योगबल से इस पुरानी दुनिया को परिवर्तन कर नया बनाते हो, तुम प्रकट हुए हो रूहानी सेवा के लिए''

प्रश्नः-
ईमानदार सच्चे पुरुषार्थी बच्चों की निशानियाँ क्या होंगी?

उत्तर:-
ईमानदार बच्चे कभी भी अपनी भूल को छिपायेंगे नहीं। फौरन बाबा को सुनायेंगे। वह बहुत-बहुत निरहंकारी होते हैं, उनकी बुद्धि में सदा यही ख्याल रहता कि जैसा कर्म हम करेंगे...। 2- वह किसी की डिस-सर्विस का गायन नहीं करते। अपनी सर्विस में लगे रहते हैं। वह किसी का भी अवगुण देख अपना माथा खराब नहीं करते।

गीत:-
धीरज धर मनुवा...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सर्विस का शौक रख अपना और दूसरों का कल्याण करना है। किसी की डिस-सर्विस का गायन नहीं करना है। परचिंतन में अपना समय नहीं गँवाना है।

2) ईमानदार और निरंहकारी बन सेवा को बढ़ाना है। सवेरे-सवेरे उठकर बाप को प्यार से याद करना है। कथनी और करनी समान बनानी है।

वरदान:-
मनमनाभव की स्थिति द्वारा मन के भावों को जानने वाले सफलता स्वरूप भव

जो बच्चे मनमनाभव की स्थिति में स्थित रहते हैं वह औरों के मन के भाव को जान सकते हैं। बोल भल क्या भी हो लेकिन उसका भाव क्या है, उसे जानने का अभ्यास करते जाओ। हर एक के मन के भाव को समझने से उनकी जो चाहना वा प्राप्ति की इच्छा है, वह पूरी कर सकेंगे। इससे वे अविनाशी पुरुषार्थी बन जायेंगे फिर सर्विस की सफलता थोड़े समय में बहुत दिखाई देगी और आप पुरुषार्थी स्वरूप के बजाए सफलता स्वरूप बन जायेंगे।

स्लोगन:-
सोते समय सब कुछ बाप हवाले कर खाली हो जाओ तो व्यर्थ वा विकारी स्वप्न नहीं आयेंगे।

ये अव्यक्त इशारे - अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो

आप आत्मायें ब्राह्मण जीवन में ऐसे पवित्र बनते हो जो शरीर भी, प्रकृति भी पवित्र बना देते हो इसलिए शरीर भी पवित्र है तो आत्मा भी पवित्र है। सम्पूर्ण पवित्र अर्थात् अपवित्रता का अंश-मात्र भी न हो क्योंकि जितनी पवित्रता है उतनी ब्राह्मण जीवन की पर्सनैलिटी है। अगर पवित्रता कम तो पर्सनैलिटी कम। ये प्योरिटी की पर्सनैलिटी सेवा में भी सहज सफलता दिलायेगी।