07-03-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम इस समय बाप के साथ सेवा में मददगार बने हो इसलिए तुम्हारा सिमरण होता है, पूजन नहीं, क्योंकि शरीर अपवित्र है''

प्रश्नः-
कौन सा नशा तुम बच्चों की बुद्धि में निरन्तर रहना चाहिए?

उत्तर:-
हम शिवबाबा के बच्चे हैं, उनसे राजयोग सीख स्वर्ग की राजाई का वर्सा लेते हैं, यह नशा तुम्हें निरन्तर रहना चाहिए। विश्व का मालिक बनना है तो बहुत खबरदारी से पढ़ना और पढ़ाना है। कभी भी बाप की निंदा नहीं करानी है। किसी से भी लड़ना झगड़ना नहीं है। तुम कौड़ी से हीरे जैसा बनते हो तो अच्छी रीति धारणा करनी है।

गीत:-
जो पिया के साथ है...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सबसे मीठा बोलना है, ऐसी कोई बात नहीं करनी है, जिससे बाप की निंदा हो। देह-अभिमान का दान कर आत्म-अभिमानी और परमात्म-अभिमानी बनना है।

2) जो ज्ञान धन मिलता है, उसका दान करना है, पढ़ाई से राजाई मिलती है इस नशे में स्थाई रहना है। अटेन्शन देकर पढ़ाई पढ़नी है।

वरदान:-
साक्षीपन की सीट द्वारा परेशानी शब्द को समाप्त करने वाले मास्टर त्रिकालदर्शी भव

इस ड्रामा में जो कुछ भी होता है उसमें कल्याण भरा हुआ है, क्यों, क्या का क्वेश्चन समझदार के अन्दर उठ नहीं सकता। नुकसान में भी कल्याण समाया हुआ है, बाप का साथ और हाथ है तो अकल्याण हो नहीं सकता। ऐसे शान की शीट पर रहो तो कभी परेशान नहीं हो सकते। साक्षीपन की शीट परेशानी शब्द को खत्म कर देती है, इसलिए त्रिकालदर्शी बन प्रतिज्ञा करो कि न परेशान होंगे, न परेशान करेंगे।

स्लोगन:-
अपनी सर्व कर्मेन्द्रियों को आर्डर प्रमाण चलाना ही स्वराज्य अधिकारी बनना है।

ये अव्यक्त इशारे - “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"

निश्चयबुद्धि का अर्थ है बेफिक्र बादशाह, वही बाप समान है। विनाशी धन वाले जितना कमाते उतना समय प्रमाण फिक्र में रहते। लेकिन जिन्हें फेथ है कि हम ईश्वरीय खजानों के मालिक और परमात्म बालक हैं वह सदा ही स्वप्न में भी बेफिक्र बादशाह हैं, क्योंकि उनको विश्वास है कि यह ईश्वरीय खजाने इस जन्म में तो क्या लेकिन अनेक जन्म साथ हैं, साथ रहेंगे इसीलिए वह निश्चयबुद्धि, निश्चिंत रहते हैं।