07-08-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - अब तक जो कुछ पढ़ा है, उसे भूल एक बाप को याद करो''

प्रश्नः-
भारत पर सतयुगी स्वराज्य स्थापन करने के लिए कौनसा बल चाहिए?

उत्तर:-
पवित्रता का बल। तुम सर्वशक्तिवान बाप से योग लगाकर पवित्र बनते हो। यह पवित्रता का ही बल है जिससे सतयुगी स्वराज्य की स्थापना होती है, इसमें लड़ाई आदि की कोई बात नहीं। ज्ञान और योगबल ही पावन दुनिया का मालिक बना देता है। इसी बल से एक मत की स्थापना हो जाती है।

गीत:-
आखिर वह दिन आया आज...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) संगमयुग पर श्रेष्ठ कर्म करके पुरुषोत्तम बनना है। कोई भी ऐसा कर्म नहीं करना है जो कनिष्ट बन जाये।

2) गुप्त रूप में बाप का मददगार बन भारत को स्वर्ग बनाने की सेवा करनी है। अपने ही तन-मन-धन से भारत को स्वर्ग बनाना है। याद और पवित्रता का बल जमा करना है।

वरदान:-
अपनी सम्पूर्ण स्टेज द्वारा सर्व प्रकार की अधीनता समाप्त करने वाले प्रकृति जीत भव

जब आप अपनी सम्पूर्ण स्टेज पर स्थित होंगे तो प्रकृति पर भी विजय अर्थात् अधिकार का अनुभव होगा। सम्पूर्ण स्टेज में किसी भी प्रकार की अधीनता नहीं रहती है। लेकिन ऐसी सम्पूर्ण स्टेज बनाने के लिए तीन बातें साथ-साथ चाहिए:- 1-रूहानियत, 2-रूहाब और 3-रहमदिल का गुण। जब यह तीनों बातें प्रत्यक्ष रूप में, स्थिति में, चेहरे वा कर्म में दिखाई दें तब कहेंगे अधिकारी वा प्रकृति जीत आत्मा।

स्लोगन:-
श्रीमत की लगाम मजबूत है तो मन रूपी घोड़ा भाग नहीं सकता।

ये अव्यक्त इशारे - अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो

अगर कोई भी अपवित्रता वृत्ति, स्मृति वा संकल्प में है तो ब्राह्मण-पन की स्थिति में स्थित नहीं हो सकते इसलिए कदम-कदम पर सावधान रहो। विशेषताओं के साथ अगर कोई एक भी कमजोरी है तो एक कमजोरी अनेक विशेषताओं को समाप्त कर देती है।