09-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम यहाँ आये हो सेल्फ रियलाइज़ करने, तुम अपने को आत्मा समझ परमात्मा बाप से सुनो, देही-अभिमानी रहने का अभ्यास करो''

प्रश्नः-
कई बार बच्चों से कोई-कोई पूछते हैं कि तुमने आत्मा का साक्षात्कार किया है, तो तुम उन्हें कौन सा उत्तर दो?

उत्तर:-
बोलो हाँ, हमने आत्मा का साक्षात्कार किया है। आत्मा ज्योतिबिन्दू है। आत्मा में ही अच्छे वा बुरे संस्कार हैं। आत्मा की सारी नॉलेज अभी हमें मिली है। जब तक आत्मा का साक्षात्कार नहीं किया था तब तक देह-अभिमानी थे। अभी हमें परमात्मा द्वारा गॉड रियलाइजेशन और सेल्फ रियलाइजेशन हुआ है।

गीत:-
न वह हमसे जुदा होंगे...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) सवेरे-सवेरे उठकर विचार सागर मंथन करना है। बाप जो सुनाते हैं उसे नोट कर रिपीट करना है, दूसरों को सुनाना है। सबको पहले-पहले बाप का ही परिचय देना है।

2) पावन दुनिया में चलने के लिए इस पतित दुनिया से बुद्धियोग निकाल देना है।

वरदान:-
नम्बरवन बिजनेसमैन बन एक एक सेकण्ड वा संकल्प में कमाई जमा करने वाले पदमपति भव

नम्बरवन बिजनेसमैन वह है जो स्वयं को बिजी रखने का तरीका जानता है। बिजनेसमैन अर्थात् जिसका एक संकल्प भी व्यर्थ न जाये, हर संकल्प में कमाई हो। जैसे वह बिजनेसमैन एक एक पैसे को कार्य में लगाकर पदमगुणा बना देते हैं, ऐसे आप भी एक एक सेकण्ड वा संकल्प कमाई करके दिखाओ तब पदमपति बनेंगे। इससे बुद्धि का भटकना बंद हो जायेगा और व्यर्थ संकल्पों की कम्पलेन भी समाप्त हो जायेगी।

स्लोगन:-
जो मंगता है वो खुशी के खजाने से सम्पन्न नहीं हो सकता।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

सदा मास्टर सर्वशक्तिवान की सीट पर सेट रहने वाले ही अचल अडोल रहते हैं। बापदादा कहते हैं बच्चे शरीर भी चला जाये लेकिन आपकी खुशी नहीं जाये। पैसा तो उसके आगे कुछ भी नहीं है, जिसके पास खुशी का खजाना है उसके आगे कोई बड़ी बात नहीं और सदा सहयोगी सेवाधारी बच्चों के साथ बापदादा रहते हैं इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।