10-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप आये हैं, भारत को सैलवेज करने, तुम बच्चे इस समय बाप के मददगार बनते हो, भारत ही प्राचीन खण्ड है''

प्रश्नः-
ऊंची मंजिल में रूकावट डालने वाली छोटी-छोटी बातें कौन सी हैं?

उत्तर:-
अगर जरा भी कोई शौक है, अनासक्त वृत्ति नहीं है। अच्छा पहनने, खाने में बुद्धि भटकती रहती है... तो यह बातें ऊंची मंजिल पर पहुंचने में अटक (रुकावट) डालती हैं इसलिए बाबा कहते बच्चे, वनवाह में रहो। तुम्हें तो सब कुछ भूलना है। यह शरीर भी याद न रहे।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बुद्धि से बेहद का संन्यास करना है। वापस घर जाने का समय है इसलिए पुरानी दुनिया और पुराने शरीर से अनासक्त रहना है।

2) ड्रामा की हर सीन को देखते हुए सदा हर्षित रहना है।

वरदान:-
बापदादा को अपना साथी समझकर डबल फोर्स से कार्य करने वाले सहजयोगी भव

कोई भी कार्य करते बापदादा को अपना साथी बना लो तो डबल फोर्स से कार्य होगा और स्मृति भी बहुत सहज रहेगी क्योंकि जो सदा साथ रहता है उसकी याद स्वत: बनी रहती है। तो ऐसे साथी रहने से वा बुद्धि द्वारा निरन्तर सत का संग करने से सहजयोगी बन जायेंगे और पावरफुल संग होने के कारण हर कर्तव्य में आपका डबल फोर्स रहेगा, जिससे हर कार्य में सफलता की अनुभूति होगी।

स्लोगन:-
महारथी वह है जो कभी माया के प्रभाव में परवश न हो।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

मधुरता ही ब्राह्मण जीवन की महानता है। जहाँ मधुरता है वहाँ पवित्रता है। बिना पवित्रता के मधुरता आ नहीं सकती। जितना बुद्धि में नशा हो, उतना ही कर्म में नम्रता और बोल में मधुरता हो। ऐसे नशे में रहने से कभी नुकसान नहीं होगा। सिद्धि को पाने वाले, स्वयं को नम्रचित्त, निर्माण, हर बात में अपने आपको गुणग्राहक और मधुरता सम्पन्न बनायेंगे।