10-05-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 30.01.2010 "बापदादा"    मधुबन


चारों ही सब्जेक्ट में स्वमान के अनुभवी स्वरूप बन अनुभव की अथॉरिटी को कार्य में लगाओ


वरदान:-
नॉलेज की लाइट द्वारा पुरुषार्थ के मार्ग को सहज और स्पष्ट करने वाले फरिश्ता स्वरूप भव

फरिश्तेपन की लाइफ में लाइट और माइट दोनों ही स्पष्ट दिखाई देते हैं। लेकिन लाइट और माइट रूप बनने के लिए मनन करने और सहन करने की शक्ति चाहिए। मन्सा के लिए मननशक्ति और वाचा, कर्मणा के लिए सहनशक्ति धारण करो फिर जो भी शब्द बोलेंगे, कर्म करेंगे वह उसी के प्रमाण होंगे। अगर यह दोनों शक्तियां हैं तो हर एक के लिए पुरुषार्थ का मार्ग सहज और स्पष्ट हो जायेगा।

स्लोगन:-
व्यर्थ बोलना अर्थात् अनेकों को डिस्टर्ब करना।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

आप बच्चे मास्टर प्रकृति-पति हो, इस प्रकृति के खेल को देख हर्षित होते रहो। चाहे प्रकृति हलचल करे, चाहे प्रकृति सुन्दर खेल दिखाए, दोनों में प्रकृति-पति आत्मायें साक्षी हो खेल देखती और खेल में मज़ा लेती हैं, घबराती नहीं हैं इसलिए बापदादा तपस्या द्वारा साक्षीपन की स्थिति के आसन पर अचल अडोल स्थिर रहने का विशेष अभ्यास करा रहे हैं।