11-03-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - याद की
यात्रा में रेस करो तो पुण्य आत्मा बन जायेंगे, स्वर्ग की बादशाही मिल जायेगी''
प्रश्नः-
ब्राह्मण जीवन
में अगर अतीन्द्रिय सुख का अनुभव नहीं होता है तो क्या समझना चाहिए?
उत्तर:-
जरूर सूक्ष्म
में भी कोई न कोई पाप होते हैं। देह-अभिमान में रहने से ही पाप होते हैं, जिस कारण
उस सुख की अनुभूति नहीं कर सकते हैं। अपने को गोप गोपियाँ समझते हुए भी अतीन्द्रिय
सुख की भासना नहीं आती, जरूर कोई भूल होती है इसलिए बाप को सच बतलाकर श्रीमत लेते
रहो।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) मंजिल बहुत ऊंची है इसलिए कदम-कदम पर सर्जन से राय लेनी है। श्रीमत
पर चलने में ही फायदा है, बाप से कुछ भी छिपाना नहीं है।
2) देह और देहधारियों से बुद्धि का योग हटाए एक बाप से लगाना है। कर्म करते भी
एक बाप की याद में रहने का पुरुषार्थ करना है।
वरदान:-
सदा एकरस
सम्पन्न मूड में रहने वाले पुरुषार्थी सो प्रालब्धी स्वरूप भव
बापदादा वतन से देखते हैं
कि कई बच्चों के मूड बहुत बदलते हैं, कभी आश्चर्यवत की मूड, कभी क्वेश्चन मार्क की
मूड, कभी कनफ्यूज़ की मूड, कभी टेन्शन, कभी अटेन्शन का झूला....लेकिन संगमयुग
प्रालब्धी युग है न कि पुरुषार्थी इसलिए जो बाप के गुण वही बच्चों के, जो बाप की
स्टेज वही बच्चों की - यही है संगमयुग की प्रालब्ध। तो सदा एकरस एक ही सम्पन्न मूड
में रहो तब कहेंगे बाप समान अर्थात् प्रालब्धी स्वरूप वाले।
स्लोगन:-
बापदादा
के हाथ में बुद्धि रूपी हाथ हो तो परीक्षाओं रूपी सागर में हिलेंगे नहीं।
ये अव्यक्त इशारे
- “निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो"
फेथफुल की पहली
निशानी है - हर सेकण्ड हर कदम श्रीमत पर एक्यूरेट चलना। एक्यूरेट मूर्ति बनना
अर्थात् हेमर लगना। हेमर से ही तो उसे ठोक-ठोक करके ठीक करते हैं। आप लोग तो हेमर
खाने के अनुभवी हो गये हो, नथिंग न्यु। खेल लगता है ना। देखते रहते हो और मुस्कराते
रहते हो, दुआयें देते रहते हो। हीरो एक्टर अर्थात् एक्यूरेट पार्ट बजाने वाले,
निश्चयबुद्धि निश्चिंत आत्मा।
नोट:- आज हम सबकी
अति प्रिय बापदादा के नयनों की नूर, अपने दिलतख्त पर बापदादा को बिठाने वाली मीठी
दादी गुल्जार जी के पुण्य स्मृति दिवस पर हम सब ब्राह्मण कुल भूषण भाई बहिनें उनके
द्वारा प्यारे अव्यक्त बापदादा की जो पालना मिली है, उस पालना का रिटर्न देने के
लिए शुभ संकल्प लें। जैसे दादी जी ने हर कदम श्रीमत पर एक्यूरेट चलकर, सदा अपने
मुस्कराते हुए चेहरे से सबको दुआयें दी और दुआयें ली, एक्यूरेट पार्ट बजाया। ऐसे हम
सभी उनके पद्चिन्हों पर चलकर उन्हें अपने स्नेह सुमन अर्पित करें, यही उनके प्रति
सच्ची श्रंधाजलि है। ओम् शान्ति।