12-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अभी विनाश
का समय बहुत समीप है इसलिए एक बाप से सच्ची प्रीत रखो, किसी देहधारी से नहीं''
प्रश्नः-
जिन बच्चों की
सच्ची प्रीत एक बाप से होगी उनकी निशानियाँ क्या होंगी?
उत्तर:-
1- उनका
बुद्धियोग किसी भी देहधारी के तरफ जा नहीं सकता। वह आपस में एक दो के आशिक - माशूक
नहीं बनेंगे। 2- जिनकी सच्ची प्रीत है वह सदा विजयी बनते हैं। विजयी बनना अर्थात्
सतयुग का महाराजा-महारानी बनना। 3- प्रीत बुद्धि सदा बाप के साथ सच्चे रहते हैं।
कुछ भी छिपा नहीं सकते। 4- रोज़ अमृतवेले उठ प्यार से बाप को याद करेंगे। 5- दधीचि
ऋषि की तरह सर्विस में हड्डियाँ देंगे। 6- उनकी बुद्धि दुनियावी बातों में भटक नहीं
सकती।
गीत:-
न वह हमसे जुदा
होंगे...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अमृतवेले एकान्त में बैठ बाप को प्यार से याद करना है। दुनियावी बातों
को छोड़ ईश्वरीय सेवा में लग जाना है।
2) बाप से सच्ची दिल रखनी है। आपस में एक दो के आशिक-माशूक नहीं बनना है। प्रीत
एक बाप से जोड़नी है। देहधारियों से नहीं।
वरदान:-
सर्व शक्तियों
की सम्पत्ति से सम्पन्न बन दाता बनने वाले विधाता, वरदाता भव
जो बच्चे सर्व शक्तियों के
सम्पत्तिवान हैं - वही सम्पन्न और सम्पूर्ण स्थिति के समीपता का अनुभव करते हैं।
उनमें कोई भी भक्तपन के वा भिखारीपन के संस्कार इमर्ज नहीं होते, बाप की मदद चाहिए,
आशीर्वाद चाहिए, सहयोग चाहिए, शक्ति चाहिए - यह चाहिए शब्द दाता विधाता, वरदाता
बच्चों के आगे शोभता ही नहीं। वे तो विश्व की हर आत्मा को कुछ न कुछ दान वा वरदान
देने वाले होते हैं।
स्लोगन:-
हर
आत्मा को कोई न कोई प्राप्ति कराने वाले वचन ही सत वचन हैं।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
कितना भी कोई
हिलावे लेकिन आप अचल रहो। परिस्थिति श्रेष्ठ है या स्वस्थिति श्रेष्ठ है? कभी
परिस्थिति वार तो नहीं कर लेती है? सोचो, कि ये परिस्थिति पावरफुल है या स्वस्थिति
पावरफुल है? तो इस स्मृति से कमज़ोर से शक्तिशाली बन जायेंगे। जैसे आप तपस्वी एकरस
स्थिति में एकाग्र होते हो तो हठयोगी फिर एक टांग पर खड़े हो जाते हैं। तो कहाँ
एकरस स्थिति और कहाँ एक टांग पर स्थित रहना, फ़र्क हो गया ना!