13-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप द्वारा तुम्हें जो सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त की नॉलेज मिली है, इसे तुम बुद्धि में रखते हो इसलिए तुम हो स्वदर्शन चक्रधारी''

प्रश्नः-
रूह को पावन बनाने के लिए रूहानी बाप कौन सा इन्जेक्शन लगाते हैं?

उत्तर:-
मनमनाभव का। यह इन्जेक्शन रूहानी बाप के सिवाए कोई लगा नहीं सकता। बाप कहते हैं मीठे बच्चे - तुम मुझे याद करो। बस। याद से ही आत्मा पावन बन जायेगी। इसमें संस्कृत आदि पढ़ने की भी जरूरत नहीं है। बाप तो हिन्दी में सीधे शब्दों में सुनाते हैं। रूह को जब यह निश्चय हो जाता है कि रूहानी बाप हमें पावन बनने की युक्ति बता रहे हैं तो विकारों को छोड़ती जाती है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से जो ज्ञान अमृत मिलता है, उस अमृत को पीना और पिलाना है। पुजारी से पूज्य बनने के लिए विकारों का त्याग करना है।

2) बाप जो स्वर्ग में जाने के लायक बना रहे हैं, उनकी हर बात माननी है, पूरा निश्चयबुद्धि बनना है।

वरदान:-
अनुभव की विल पावर द्वारा माया की पावर का सामना करने वाले अनुभवीमूर्त भव

सबसे पावरफुल स्टेज है अपना अनुभव। अनुभवी आत्मा अपने अनुभव की विल-पावर से माया की कोई भी पावर का, सभी बातों का, सर्व समस्याओं का सहज ही सामना कर सकती है और सभी आत्माओं को सन्तुष्ट भी कर सकती है। सामना करने की शक्ति से सर्व को सन्तुष्ट करने की शक्ति अनुभव के विल पावर से सहज प्राप्त होती है, इसलिए हर खजाने को अनुभव में लाकर अनुभवीमूर्त बनो।

स्लोगन:-
एक दो को देखने के बजाए स्वयं को देखो और परिवर्तन करो।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

अपने आपको चेक करो हर शक्ति का, हर प्राप्ति का, हर गुण का अनुभव है? अगर अनुभव की अथॉरिटी है तो कोई भी परिस्थिति अनुभव की अथॉरिटी के आगे कुछ भी प्रभाव नहीं डाल सकती। अनुभवी मूर्त कभी भी किसी भी परिस्थिति में अचल अडोल रहते हैं। हलचल में नहीं आते क्योंकि सबसे बड़े में बड़ी अथॉरिटी अनुभव है। आह्वान करो जिस समय जिस शक्ति का वो सेकण्ड में सहयोगी बनेगी।