14-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - याद की यात्रा में कभी थकना नहीं, देह-अभिमान के तूफान थकाते हैं, देही-अभिमानी बनो तो थक दूर हो जायेगा''

प्रश्नः-
कौन सा संस्कार 21 जन्मों की श्रेष्ठ तकदीर को बिगाड़ने वाला है?

उत्तर:-
अगर किसी में रूठने का संस्कार है। बाप से वा पढ़ाई से रूठ जाते हैं तो 21 जन्मों की तकदीर बिगड़ जाती है इसलिए बाबा कहते - मीठे बच्चे - देह-अभिमान के वश कभी भी यह उल्टा नशा नहीं चढ़ना चाहिए कि मैंने इतनों को समझाया, इतनी मदद की। देखो, बाबा कितनी बड़ी अथॉरिटी फिर भी कितना निरहंकारी है इसलिए सी फादर।

गीत:-
रात के राही थक मत जाना...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) विजय माला में पिरोने के लिए इस शरीर से डिटैच होने का पूरा-पूरा पुरुषार्थ करना है। देह-अभिमान को छोड़ते जाना है। इस दुनिया को बुद्धि से भूलना है।

2) टू मच धन की लालच में नहीं जाना है। बाप की याद के सिवाए दूसरा कोई चिंतन न रहे। कभी भी बाप से वा पढ़ाई से रूठना नहीं है।

वरदान:-
मालिकपन की स्मृति द्वारा हाइएस्ट अथॉरिटी का अनुभव करने वाले कम्बाइन्ड स्वरूपधारी भव

पहले अपने शरीर और आत्मा के कम्बाइंड रूप को स्मृति में रखो। शरीर रचना है, आत्मा रचता है। इससे मालिकपन स्वत: स्मृति में रहेगा। मालिकपन की स्मृति से स्वयं को हाइएस्ट अथॉरिटी अनुभव करेंगे। शरीर को चलाने वाले होंगे। दूसरा - बाप और बच्चा (शिवशक्ति) के कम्बाइन्ड स्वरूप की स्मृति से माया के विघ्नों को अथॉरिटी से पार कर लेंगे।

स्लोगन:-
विस्तार को सेकण्ड में समाकर ज्ञान के सार का अनुभव करो और कराओ।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

पाप कटेश्वर वा पाप हरनी तब बन सकते हो जब याद ज्वाला स्वरूप होगी। इसी याद द्वारा अनेक आत्माओं की निर्बलता दूर होगी, इसके लिए हर सेकण्ड, हर श्वांस बाप और आप कम्बाइन्ड होकर रहो। कोई भी समय साधारण याद न हो। स्नेह और शक्ति दोनों रूप कम्बाइन्ड हो।