15-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हारे
मुख से कभी भी हे ईश्वर, हे बाबा शब्द नहीं निकलना चाहिए, यह तो भक्ति मार्ग की
प्रैक्टिस है''
प्रश्नः-
तुम बच्चे
सफेद ड्रेस पसन्द क्यों करते हो? यह किस बात का प्रतीक है?
उत्तर:-
अभी तुम इस
पुरानी दुनिया से जीते जी मर चुके हो इसलिए तुम्हें सफेद ड्रेस पसन्द है। यह सफेद
ड्रेस मौत को सिद्ध करता है। जब कोई मरता है तो उस पर भी सफेद कपड़ा डालते हैं, तुम
बच्चे भी अभी मरजीवा बने हो।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) भाई-भाई की दृष्टि का अभ्यास करते हुए लौकिक बन्धनों से तोड़ निभाना
है। बड़ी युक्ति से चलना है। विकारी दृष्टि बिल्कुल नहीं जानी चाहिए। कयामत के समय
सम्पूर्ण पावन बनना है।
2) बाप से पूरा वर्सा लेने के लिए अच्छी रीति पढ़ाई करनी है और पतित-पावन बाप से
योग लगाकर पावन बनना है।
वरदान:-
अपनी
सम्पूर्णता के आधार पर समय को समीप लाने वाले मास्टर रचयिता भव
समय आपकी रचना है, आप
मास्टर रचयिता हो। रचयिता रचना के आधार पर नहीं होते। रचयिता रचना को अधीन करते हैं
इसलिए यह कभी नहीं सोचो कि समय आपेही सम्पूर्ण बना देगा। आपको सम्पूर्ण बन समय को
समीप लाना है। वैसे कोई भी विघ्न आता है तो समय प्रमाण जायेगा जरूर लेकिन समय से
पहले परिवर्तन शक्ति द्वारा उसे परिवर्तन कर दो - तो उसकी प्राप्ति आपको हो जायेगी।
समय के आधार पर परिवर्तन किया तो उसकी प्राप्ति आपको नहीं होगी।
स्लोगन:-
कर्म
और योग का बैलेन्स रखने वाले ही सच्चे कर्मयोगी हैं।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
जब तक
कर्मेन्द्रियों का आधार है तो कर्म तो करना ही है, लेकिन कर्म-बन्धन नहीं,
कर्म-सम्बन्ध। जीवन-मुक्त अवस्था अर्थात् सफलता भी ज्यादा और कर्म का बोझ भी नहीं।
जो मुक्त हैं वो सदा ही सफलतामूर्त हैं। जीवन-मुक्त आत्मा सदा फलक से कहेगी कि विजय
निश्चित है, सफलता जन्मसिद्ध अधिकार है।