15-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - यह दुनिया
कब्रिस्तान होने वाली है इसलिए इससे दिल नहीं लगाओ, परिस्तान को याद करो''
प्रश्नः-
तुम गरीब बच्चों
जैसा खुशनसीब दुनिया में कोई भी नहीं, क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि तुम
गरीब बच्चे ही डायरेक्ट उस बाप के बने हो जिससे सद्गति का वर्सा मिलता है। गरीब
बच्चे ही पढ़ते हैं। साहूकार यदि थोड़ा पढ़ेंगे भी, तो उन्हें बाप की याद मुश्किल
से रहेगी। तुम्हें तो अन्त में बाप के सिवाए और कुछ भी याद नहीं आयेगा इसलिए तुम
सबसे खुशनसीब हो।
गीत:-
दिल का सहारा
टूट न जाये....
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वयं रिफ्रेश रहकर औरों को रिफ्रेश करने के लिए बाप और वर्से की याद
में रहना है और सबको याद दिलाना है।
2) इस पुरानी दुनिया से, इस कब्रिस्तान से दिल नहीं लगानी है। शान्तिधाम, सुखधाम
को याद करना है। स्वयं को देवता बनने के लायक बनाना है।
वरदान:-
ईश्वरीय
अथॉरिटी द्वारा संकल्प वा बुद्धि को आर्डर प्रमाण चलाने वाले मास्टर सर्वशक्तिवान
भव
जैसे स्थूल हाथ पांव को
बिल्कुल सहज रीति जहाँ चाहो वहाँ चलाते हो वा कर्म में लगाते हो वैसे संकल्प वा
बुद्धि को जहाँ लगाने चाहो वहाँ लगा सको - इसे ही कहते हैं ईश्वरीय अथॉरिटी। जैसे
वाणी में आना सहज है वैसे वाणी से परे जाना भी इतना ही सहज हो, इसी अभ्यास से
साक्षात्कार मूर्त बनेंगे। तो अब इस अभ्यास को सहज और निरन्तर बनाओ तब कहेंगे
मास्टर सर्वशक्तिवान।
स्लोगन:-
स्वस्थिति
शक्तिशाली हो तो परिस्थिति उसके आगे कुछ भी नहीं है।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
आपके एकरस अचल
स्थिति का ही यह अचलघर यादगार है। जैसे बापदादा एकरस रहते हैं वैसे बच्चों को भी
एकरस रहना है। जब एक के ही रस में रहेंगे तो एकरस अवस्था में रहेंगे। क्यों शब्द की
निशानी क्वेश्चन मार्क सभी से टेढ़ा होता है। जब क्यों, क्या शब्द निकल जायेगा तब
ड्रामा की भावी पर एकरस स्थेरियम रह सकेंगे।