15-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - योगबल से ही आत्मा की कट निकलेगी, इसलिए योग में कभी भी ग़फलत नहीं करो''

प्रश्नः-
बाप ने बच्चों को बेहद का वर्सा लेने की कौन सी युक्ति बताई जिसमें माया चारों तरफ विघ्न डालती है?

उत्तर:-
बाबा ने युक्ति बताई बच्चे तुम ब्रह्माकुमार कुमारियां एक बाप के बच्चे आपस में भाई-बहिन हो, तुम कभी क्रिमिनल एसाल्ट नहीं कर सकते। भाई बहिन विकार में नहीं जा सकते, तुम्हें शिवबाबा की मत पर चलकर बेहद का वर्सा लेना है। परन्तु माया कम नहीं है, चारों तरफ इसमें ही विघ्न डालती रहती है। हम भाई बहिन हैं, एक बाप से वर्सा लेते हैं, यह भूल जाते हैं।

गीत:-
तुम्हें पाके हमने...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) कर्मातीत अवस्था को प्राप्त कर वापस घर जाना है परन्तु जायेंगे तब जब आत्माओं का आना बन्द होगा, इस विस्तार को बुद्धि में रख एक बाबुल को प्यार से याद करना है।

2) ज्ञान की रोशनी मिली है इसलिए निश्चयबुद्धि बन बाप से पूरा वर्सा लेना है। कहाँ भी रहते याद के बल से आत्मा को तमोप्रधान से सतोप्रधान बनाने का पुरुषार्थ करना है।

वरदान:-
स्वमान में स्थित रह विश्व द्वारा सम्मान प्राप्त करने वाले, देह-अभिमान मुक्त भव

पढ़ाई का मूल लक्ष्य है - देह-अभिमान से न्यारे हो देही-अभिमानी बनना। इस देह-अभिमान से न्यारे अथवा मुक्त होने की विधि ही है - सदा स्वमान में स्थित रहना। संगमयुग के और भविष्य के जो अनेक प्रकार के स्वमान हैं उनमें किसी एक भी स्वमान में स्थित रहने से देह-अभिमान मिटता जायेगा। जो स्वमान में स्थित रहता है उन्हें स्वत: मान प्राप्त होता है। सदा स्वमान में रहने वाले ही विश्व महाराजन बनते हैं और विश्व उन्हें सम्मान देती है।

स्लोगन:-
जैसा समय वैसा अपने को मोल्ड कर लेना - यही है रीयल गोल्ड बनना।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

अभी निर्भय ज्वालामुखी बन प्रकृति और आत्माओं के अन्दर जो तमोगुण है उसे भस्म करो। तपस्या अर्थात् ज्वाला स्वरूप याद, इस याद द्वारा ही माया वा प्रकृति का विकराल रूप शीतल हो जायेगा। आपका तीसरा नेत्र, ज्वालामुखी नेत्र माया को शक्तिहीन कर देगा।