16-01-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम जो भी
कर्म करते हो उसका फल अवश्य मिलता है, निष्काम सेवा तो केवल एक बाप ही करते हैं''
प्रश्नः-
यह क्लास बड़ा
वण्डरफुल है कैसे? यहाँ मुख्य मेहनत कौन सी करनी होती है?
उत्तर:-
यही एक क्लास
है जिसमें छोटे बच्चे भी बैठे हैं तो बूढ़े भी बैठे हैं। यह क्लास ऐसा वन्डरफुल है
जो इसमें अहिल्यायें, कुब्जायें, साधू भी आकर एक दिन यहाँ बैठेंगे। यहाँ है ही
मुख्य याद की मेहनत। याद से ही आत्मा और शरीर की नेचरक्युअर होती है परन्तु याद के
लिए भी ज्ञान चाहिए।
गीत:-
रात के राही.......
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) यह विनाश भी शुभ कार्य के लिए है इसलिए डरना नहीं है, कल्याणकारी बाप
सदा कल्याण का ही कार्य कराते हैं, इस स्मृति से सदा खुशी में रहना है।
2) सदा एक ही फुरना रखना है कि सतोप्रधान सच्चा सोना बन ऊंच पद पाना है। जो
रूहानी भोजन मिलता है उसे उगारना है।
वरदान:-
स्वयं को
जिम्मेवार समझकर हर कर्म यथार्थ विधि से करने वाले सम्पूर्ण सिद्धि स्वरुप भव
इस समय आप संगमयुगी
श्रेष्ठ आत्माओं का हर श्रेष्ठ कर्म सारे कल्प के लिए विधान बन रहा है। तो स्वयं को
विधान के रचयिता समझकर हर कर्म करो, इससे अलबेलापन स्वत: समाप्त हो जायेगा। संगमयुग
पर हम विधान के रचयिता, जिम्मेवार आत्मा हैं - इस निश्चय से हर कर्म करो तो यथार्थ
विधि से किये हुए कर्म की सम्पूर्ण सिद्धि अवश्य प्राप्त होगी।
स्लोगन:-
सर्वशक्तिमान् बाप साथ हो तो माया पेपर-टाइगर बन जायेगी।
अव्यक्त इशारे -
इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करो
सदा जीवन-मुक्त
रहने का सहज साधन है - ‘मैं' और ‘मेरा बाबा'! क्योंकि मेरे-मेरे का ही बंधन है। मेरा
बाबा हो गया तो सब मेरा खत्म। जब ‘एक मेरा' में ‘सब मेरा-मेरा' समाप्त हो गया, तो
बंधन-मुक्त हो गये। तो यही याद रखना कि हम ब्राह्मण जीवन-मुक्त आत्मा हैं।