16-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सदैव याद रखो
- बहुत गई थोड़ी रही, अब तो घर चलना है, इस छी-छी शरीर और दुनिया को भूल जाना है''
प्रश्नः-
कौन सा नशा
निरन्तर रहे तो स्थिति बड़ी फर्स्टक्लास होगी?
उत्तर:-
निरन्तर नशा
रहे कि मिरूआ मौत मलूका शिकार। हम मलूक (फरिश्ता) बन अपने माशूक के साथ घर जायेंगे,
बाकी सब खलास होना है। अब हम इस पुरानी खाल को छोड़ नई लेंगे। यह ज्ञान सारा दिन
बुद्धि में टपकता रहे तो अपार खुशी रहेगी। स्थिति फर्स्टक्लास बन जायेगी।
गीत:-
यह कौन आज आया...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करने के लिए देह के भान को तोड़ने का
पुरुषार्थ करना है। अब वापिस घर जाना है इसलिए बुद्धियोग घर से लगा रहे।
2) गृहस्थ व्यवहार में रहते पढ़ाई भी पढ़नी है, डबल कोर्स उठाना है। ज्ञान का
स्नान और याद की यात्रा करनी और करानी है।
वरदान:-
कोमलता को
कमाल में परिवर्तन कर माया जीत बनने वाले शक्ति स्वरूप भव
शक्ति स्वरूप बनने के लिए
कोमलता को कमाल में परिवर्तन करो। सिर्फ स्वयं के संस्कारों को परिवर्तन करने में
कोमल बनो, कर्म में कभी कोमल नहीं बनना, इसमें शक्ति रूप बनना है। जो शक्ति रूप का
कवच धारण कर लेते हैं उन्हें माया का कोई भी तीर लग नहीं सकता। इसलिए आपके चेहरे,
नयन-चैन से कोमलता के बजाए शक्ति रूप दिखाई दे तब मायाजीत बन पास विद आनर का
सर्टीफिकेट ले सकेंगे।
स्लोगन:-
त्रिकालदर्शी
की सीट पर सेट होकर हर कर्म करो तो माया दूर से ही भाग जायेगी।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
जैसे साकार बाप ने
अथक और एकरस स्थिति का एक्जैम्पुल बनकर दिखाया, वैसे आप बच्चों को भी औरों के प्रति
एक्जैम्पुल बनना है, यही सर्विस है। सर्विस सिर्फ वाणी से ही नहीं होती, स्थिति से
भी सर्विस होती है। तो समय प्रमाण अब अपनी स्थिति एकरस बनाओ।