16-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - आपस में एक दो को बाप की याद में रहने का
इशारा देते, सावधान करते उन्नति को पाते रहो''
प्रश्नः-
बाप समान
नॉलेजफुल बनने वाले बच्चों के जीवन की मुख्य धारणा सुनाओ?
उत्तर:-
वह सदैव
मुस्कराते रहते, कभी भी किसी बात में उन्हें रोना नहीं आ सकता। कुछ भी होता है
नथिंग न्यु। ऐसे जो अभी नॉलेजफुल अर्थात् रोना प्रूफ बनते हैं, कभी किसी बात में
अशान्त नहीं होते, उन्हें ही स्वर्ग की बादशाही मिलती है। जिन रोया तिन खोया, रोने
वाले अपना पद गँवाते हैं।
गीत:-
तुम्हें पाके
हमने......
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
एक बाप में ही शुद्ध सच्चा मोह रखना है, उसे ही याद करना है। देहधारियों से ममत्व
निकाल देना है। ट्रस्टी होकर सम्भालना है।
2) विकर्माजीत बनना
है इसलिए कर्मेन्द्रियों से कोई भी विकर्म न हो, इसका बहुत-बहुत ध्यान रखना है।
वरदान:-
अपने श्रेष्ठ
स्वरूप वा श्रेष्ठ नशे में स्थित रह अलौकिकता का अनुभव कराने वाले अन्तर्मुखी भव
जैसे सितारों के
संगठन में विशेष सितारों की चमक दूर से ही न्यारी प्यारी लगती है, ऐसे आप सितारे
साधारण आत्माओं के बीच में एक विशेष आत्मा दिखाई दो, साधारण रूप में होते असाधारण
वा अलौकिक स्थिति हो तो संगठन के बीच में अल्लाह लोग दिखाई पड़ेंगे। इसके लिए
अन्तर्मुखी बनकर फिर बाहरमुखता में आने का अभ्यास हो। सदैव अपने श्रेष्ठ स्वरूप वा
नशे में स्थित होकर, नॉलेजफुल के साथ पावरफुल बनकर नॉलेज दो तब अनेक आत्माओं को
अनुभवी बना सकेंगे।
स्लोगन:-
रावण की
जायदाद साथ में रख ली तो दिल में दिलाराम ठहर नहीं सकता।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
आप दाता के बच्चे सभी
को देने वाले मास्टर दाता हो। आप अपनी एक सेकेण्ड की दृष्टि से, अमूल्य बोल से
प्यासी आत्माओं की प्यास बुझाओ। कोई भी दर पर आयी हुई भूखी आत्मा खाली हाथ न जाये।
जैसे साकार में करके दिखाया, कोई भी आत्मा असन्तुष्ट होकर नहीं गई। तो भल कोई कैसी
भी आत्मा हो लेकिन सन्तुष्ट होकर जाये।