17-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - यह भारत भूमि निराकार बाप की जन्म-भूमि है,
यहाँ ही बाप आते हैं तुम्हें राजयोग सिखलाकर राजाई देने, तुम्हारी सेवा करने''
प्रश्नः-
शिवबाबा अपने
हर एक बच्चे से कौन सी प्रतिज्ञा कराते हैं?
उत्तर:-
मीठे बच्चे -
प्रतिज्ञा करो कि बाबा हम कोई भी विकर्म नहीं करेंगे। 5 विकारों का हम दान देते
हैं। अन्दर में डर रहना चाहिए - अगर हम दान देकर फिर वापिस लेंगे तो बहुत पाप बन
जायेगा, जिसकी कड़ी सज़ा खानी पड़ेगी। हरिश्चन्द्र की कहानी भी इसी पर बनी हुई है।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
कर्मातीत अवस्था को प्राप्त करने के लिए इन कर्मेन्द्रियों से कोई भी भूल नहीं करनी
है। पवित्र रहने के साथ-साथ याद में भी मजबूत होना है।
2) सदा पुण्य आत्मा
बनने के लिए तन-मन-धन से बाप पर बलिहार जाना है। एक बार बलिहार जाने से 21 जन्म के
लिए पुण्य आत्मा बन जायेंगे।
वरदान:-
सहजयोग को
नेचर और नैचुरल बनाने वाले हर सबजेक्ट में परफेक्ट भव
जैसे बाप के बच्चे हो
- इसमें कोई परसेन्टेज़ नहीं है, ऐसे निरन्तर सहजयोगी वा योगी बनने की स्टेज में अब
परसेन्टेज खत्म होनी चाहिए। नैचुरल और नेचर हो जानी चाहिए। जैसे कोई की विशेष नेचर
होती है, उस नेचर के वश न चाहते भी चलते रहते हैं। ऐसे यह भी नेचर बन जाए। क्या करूं,
कैसे योग लगाऊं - यह बातें खत्म हो जाएं तो हर सबजेक्ट में परफेक्ट बन जायेंगे।
परफेक्ट अर्थात् इफेक्ट और डिफेक्ट से परे।
स्लोगन:-
सहन करना है
तो खुशी से करो, मज़बूरी से नहीं।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
पावरफुल योग अर्थात्
लगन की अग्नि, ज्वाला रूप की याद ही भ्रष्टाचार, अत्याचार की अग्नि को समाप्त करेगी
और सर्व आत्माओं को सहयोग देगी, इससे ही बेहद की वैराग्य वृत्ति प्रज्वलित होगी।
याद की अग्नि एक तरफ उस अग्नि को समाप्त करेगी दूसरी तरफ आत्माओं को परमात्म सन्देश
की, शीतल स्वरूप की अनुभूति करोयगी, इससे ही आत्मायें पापों की आग से मुक्त हो
सकेंगी।