18-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम बाप द्वारा सम्मुख पढ़ रहे हो, तुम्हें सतयुगी बादशाही का लायक बनने के लिए पावन जरूर बनना है''

प्रश्नः-
बाप के किस आक्यूपेशन को तुम बच्चे ही जानते हो?

उत्तर:-
तुम जानते हो कि हमारा बाप, बाप भी है, टीचर और सतगुरू भी है। बाप कल्प के संगमयुग पर आते हैं, पुरानी दुनिया को नया बनाने, एक आदि सनातन धर्म की स्थापना करने। बाप अभी हम बच्चों को मनुष्य से देवता बनाने के लिए पढ़ा रहे हैं। यह आक्यूपेशन हम बच्चों के सिवाए और कोई नहीं जानता।

गीत:-
भोलेनाथ से निराला....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप से जो पवित्र बनने की प्रतिज्ञा की है उस पर पक्का रहना है। काम, क्रोध आदि भूतों पर विजय अवश्य प्राप्त करनी है।

2) चलते-फिरते हर कार्य करते पढ़ाने वाले बाप को याद रखना है। अब नाटक पूरा हो रहा है इसलिए इस अन्तिम जन्म में पवित्र जरूर बनना है।

वरदान:-
सर्व खजानों से भरपूर बन अपने चेहरे द्वारा सेवा करने वाले सच्चे सेवाधारी भव

जो बच्चे सर्व खजानों से सदा सम्पन्न वा भरपूर रहते हैं उनके नयनों वा मस्तक द्वारा ईश्वरीय नशा दिखाई देता है। उनका चेहरा ही सेवा करता है। जिसके पास जास्ती अथवा कम जमा होता है तो वह भी उनके चेहरे से दिखाई देता है। जैसे कोई ऊंच कुल का होता है तो उनके चेहरे से वह झलक और फलक दिखाई देती है। ऐसे आपकी सूरत हर संकल्प हर कर्म को स्पष्ट करे तब कहेंगे सच्चे सेवाधारी।

स्लोगन:-
समय और संकल्प के खजाने की बचतकर जमा का खाता बढ़ाओ।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

जब एक दो को मीठा खिलाते हो उसमें मुख थोड़े समय के लिए मीठा होता है लेकिन स्वयं ही मीठा बन जाओ, मुख में सदा ही मधुर बोल रहें। जैसे मीठा खाने और खिलाने से खुश होते हो ऐसे मधुर बोल स्वयं को भी खुश करते, दूसरे को भी खुश कर देते। इससे सदा सर्व का मुख मीठा करते रहो, सदा मीठी दृष्टि, मीठा बोल, मीठे कर्म हो।