18-05-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इसी रूहानी
नशे में रहो कि हम ईश्वरीय फैमिली के हैं, हम अपनी गुप्त दैवी राजधानी स्थापन कर रहे
हैं''
प्रश्नः-
बच्चों में
कौन सी आदत पक्की हो तो सारा दिन खुशी बनी रहे?
उत्तर:-
अगर
सवेरे-सवेरे उठकर विचार सागर मंथन करने की आदत हो तो सारा दिन अपार खुशी रहे। बाप
की श्रीमत है बच्चे, अमृतवेले उठकर अपने बाप से मीठी-मीठी बातें करो। विचार करो -
हम अभी किस फैमिली के हैं। हमारा कर्तव्य क्या है, अगर बुद्धि में रहे कि हमारी यह
ईश्वरीय फैमिली है, हम अपनी नई राजधानी स्थापन कर रहे हैं तो सारा दिन खुशी बनी रहे।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) किसी भी देहधारी की याद न आये, इसके लिए किसी से भी प्यार नहीं करना
है। इससे भी पार जाना है। बहुत खबरदारी रखनी है। माया के विकल्पों से घबराना नहीं
है, विजयी बनना है।
2) ध्यान दीदार में माया की बहुत प्रवेशता होती है इस भूत प्रवेशता से अपने को
बचाना है। बाप को अपना सच्चा-सच्चा समाचार देना है।
वरदान:-
हर बात में
सार को ग्रहण कर आलराउण्ड बनने वाले सरल पुरुषार्थी भव
जो भी बात देखते हो, सुनते
हो - उसके सार को समझ लो और जो बोल बोलो, जो कर्म करो उसमें सार भरा हुआ हो तो
पुरुषार्थ सरल हो जायेगा। ऐसा सरल पुरुषार्थी सब बातों में आलराउण्ड होता है। उसमें
कोई भी कमी दिखाई नहीं देती। कोई भी बात में हिम्मत कम नहीं होती, मुख से ऐसे बोल
नहीं निकलते कि हम यह नहीं कर सकते। ऐसे सरल पुरुषार्थी स्वयं भी सरलचित रहते हैं
और दूसरों को सरलचित बना देते हैं।
स्लोगन:-
साधन यूज़ करते
उनके प्रभाव से न्यारे और बाप के प्यारे बनो।
ये अव्यक्त इशारे
- सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
एकरस स्थिति बनाने
के लिए सिवाए एक के और कुछ भी देखते हुए न देखो। यह जो कुछ देखते हो यह कोई भी वस्तु
रहने वाली नहीं है। तो एकरस, स्थेरियम तब रह सकेंगे जब कोई भी दृश्य देखते क्यों,
क्या की उत्पति न हो, यही व्यर्थ संकल्पों की हलचल का कारण है। इस क्यु की समाप्ति
के बाद ही सम्पूर्णता आयेगी।