18-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस पुरानी दुनिया में जिस प्रकार की आशायें
मनुष्य रखते हैं वह आशायें तुम्हें नहीं रखनी है, क्योंकि यह दुनिया विनाश होनी
है''
प्रश्नः-
संगमयुग पर
कौन सी आश रखो तो सब आशायें सदा के लिए पूरी हो जायेंगी?
उत्तर:-
हमें पावन बन,
बाप को याद कर उनसे पूरा वर्सा लेना है - सिर्फ यही आश हो। इसी आश से सदा के लिए सब
आशायें पूरी हो जायेंगी। आयुश्वान भव, पुत्रवान भव, धनवान भव..... सब वरदान मिल
जायेंगे। सतयुग में सब कामनायें पूरी हो जायेंगी।
गीत:-
तुम्हीं हो
माता, तुम्हीं पिता हो...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस कलियुगी दुनिया में कोई भी उल्टी आश नहीं रखनी है। सम्पूर्ण सतोप्रधान बनने के
लिए ईश्वरीय मत पर चलना है।
2) पावन बनकर वापिस
घर जाना है, यही एक आश रखनी है। अन्त मती सो गति। माया के तूफानों में समय नहीं
गँवाना है।
वरदान:-
सदा पावरफुल
वृत्ति द्वारा बेहद की सेवा में तत्पर रहने वाले हद की बातों से मुक्त भव
जैसे साकार बाप को
सेवा के सिवाए कुछ भी दिखाई नहीं देता था, ऐसे आप बच्चे भी अपने पावरफुल वृत्ति
द्वारा बेहद की सेवा पर सदा तत्पर रहो तो हद की बातें स्वत: खत्म हो जायेंगी। हद की
बातों में समय देना - यह भी गुडियों का खेल है जिसमें समय और एनर्जी वेस्ट जाती है
इसलिए छोटी-छोटी बातों में समय वा जमा की हुई शक्तियां व्यर्थ नहीं गंवाओ।
स्लोगन:-
सेवा में सफलता
प्राप्त करनी है तो बोल और चाल-चलन प्रभावशाली हो।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
समय प्रमाण अब सर्व
ब्राह्मण आत्माओं को समीप लाते हुए ज्वाला स्वरूप का वायुमण्डल बनाने की सेवा करो,
उसके लिए चाहे भट्ठियां करो या आपस में संगठित होकर रूहरिहान करो लेकिन ज्वाला
स्वरूप का अनुभव करो और कराओ, इस सेवा में लग जाओ तो छोटी-छोटी बातें सहज परिवर्तन
हो जायेंगी।