18-09-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - पतित-पावन बाप की श्रीमत पर तुम पावन बनते
हो इसलिए तुम्हें पावन दुनिया की राजाई मिलती, अपनी मत पर पावन बनने वालों को कोई
प्राप्ति नहीं''
प्रश्नः-
बच्चों को
सर्विस पर विशेष किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर:-
जब सर्विस में
जाते हो तो कभी छोटी मोटी बात में एक दूसरे से रूठो मत अर्थात् नाराज़ न हो। अगर
आपस में लूनपानी होते, बात नहीं करते तो डिससर्विस के निमित्त बन जाते। कई बच्चे तो
बाप से भी रूठ जाते हैं। उल्टे कर्म करने लग पड़ते हैं। फिर ऐसे बच्चों की एडाप्शन
ही रद्द हो जाती है।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बुद्धि रूपी झोली में अविनाशी ज्ञान रत्न भरपूर कर फिर दान करना है। दान करने से ही
खुशी रहेगी। ज्ञान धन बढ़ता जायेगा।
2) कभी भी आपस में
बिगड़कर लूनपानी नहीं होना है। बहुत प्यार से बाप को याद करना है और मुरली सुननी
है। तवाई नहीं बनना है।
वरदान:-
एक बाप से योग
रख सर्व का सहयोग प्राप्त करने वाले सच्चे योगी व सहयोगी भव
जो जितना योगी है उतना
उसे सर्व का सहयोग अवश्य प्राप्त होता है। योगी का कनेक्शन अथवा स्नेह बीज से होने
के कारण स्नेह का रिटर्न सबका सहयोग प्राप्त हो जाता है। तो बीज से योग लगाने वाला,
बीज को स्नेह का पानी देने वाला सर्व आत्माओं द्वारा सहयोग रूपी फल प्राप्त कर लेता
है क्योंकि बीज से योग होने के कारण पूरे वृक्ष के साथ कनेक्शन हो जाता है।
स्लोगन:-
पुराने
संस्कारों को मेरा कहना अर्थात् पुरषार्थ को ढीला करना।
ये अव्यक्त इशारे -
अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो
कभी भी किसी भी
प्रकार का किसको सहयोग चाहिए तो दाता के बच्चे उन्हें सहयोग दो। लेकिन सर्व के
सहयोगी तब बनेंगे जब सर्व के स्नेही बनेंगे। स्नेही नहीं तो सर्व के सहयोगी भी नहीं
बन सकते इसलिए मन्सा, वाचा, कर्मणा और सम्बन्ध में भी सहयोगी और सफलतामूर्त बनो।