19-05-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - आत्म-अभिमानी भव, चलते-फिरते, उठते-बैठते यही अभ्यास करते रहो तो तुम्हारी बहुत उन्नति होती रहेगी''

प्रश्नः-
बाप की एक्यूरेट याद किन बच्चों की बुद्धि में रहेगी?

उत्तर:-
जिन बच्चों ने बाप को एक्यूरेट जाना है। कई बच्चे कहते हैं कि बिन्दू को भला कैसे याद करें। भक्ति में तो अखण्ड ज्योति समझ याद करते आये, अभी बिन्दी कहकर मूँझ जाते हैं इसलिए पहले-पहले यह निश्चय हो कि बाप अखण्ड ज्योति नहीं, वह तो अति सूक्ष्म बिन्दू है तब याद एक्यूरेट रह सकती है।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) स्वदर्शन चक्रधारी बन 84 का चक्र बुद्धि में फिराते रहना है। बेहद बाप को याद कर बेहद का वर्सा लेना है, पावन बनना है।

2) किसी भी चीज़ की लालच नहीं करनी है, जो मिले उसमें खुश रहना है। रोटी-टुकड़ खाना है, बाप की याद में रहना है।

वरदान:-
सर्व के दिलों के राज़ को जान सर्व को राज़ी करने वाले सदा विजयी भव

विजयी बनने के लिए हर एक के दिल के राज़ को जानना है। किसी के मुख द्वारा निकलने वाले आवाज से उसके दिल के राज़ को जान लो तो विजयी बन सकते हो लेकिन दिल के राज़ को जानने के लिए अन्तर्मुखता चाहिए। जितना अन्तर्मुखी रहेंगे उतना हर एक के दिल के राज़ को जानकर उसे राज़ी कर सकेंगे। राज़ी करने वाले ही विजयी बनते हैं।

स्लोगन:-
वैराग्य ऐसी योग्य धरनी है जिसमें जो भी फल डालेंगे वह फलीभूत अवश्य होगा।

ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो

सदा उमंग-हुल्लास में एकरस रहने के लिए जो भी सम्बन्ध में आते हैं - चाहे स्टूडेन्ट, चाहे साथी सभी को सन्तुष्ट करने की उत्कंठा हो। जिसको भी देखो उससे हर समय गुण उठाते रहो। सर्व के गुणों का बल मिलने से सदाकाल के लिए उत्साह एकरस रहेगा। गुणग्राही बनो। अवगुणों को देखते हुए भी नहीं देखो।