19-07-2026     प्रात:मुरली  ओम् शान्ति 18.01.2011 "बापदादा"    मधुबन


ब्रह्मा बाप समान जीवन में रहते जीवनमुक्त स्थिति की मजा लो, स्नेह की सौगात मनजीत जगतजीत बनकर दो


वरदान:-
सच्चाई-सफाई की धारणा द्वारा समीपता का अनुभव करने वाले सम्पूर्णमूर्त भव

सभी धारणाओं में मुख्य धारणा है सच्चाई और सफाई। एक दो के प्रति दिल में बिल्कुल सफाई हो। जैसे साफ चीज़ में सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। वैसे एक दो की भावना, भाव-स्वभाव स्पष्ट दिखाई दे। जहाँ सच्चाई-सफाई है वहाँ समीपता है। जैसे बापदादा के समीप हो ऐसे आपस में भी दिल की समीपता हो। स्वभाव की भिन्नता समाप्त हो जाए। इसके लिए मन के भाव और स्वभाव को मिलाना है। जब स्वभाव में फ़र्क दिखाई न दे तब कहेंगे सम्पूर्णमूर्त।

स्लोगन:-
बिगड़े हुए को सुधारना - यह सबसे बड़ी सेवा है।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

योग को ज्वाला रूप बनाने के लिए सेकण्ड में बिन्दी स्वरूप बन मन-बुद्धि को एकाग्र करने का अभ्यास बार-बार करो। स्टॉप कहा और सेकण्ड में व्यर्थ देह-भान से मन-बुद्धि एकाग्र हो जाए। ऐसी कन्ट्रोंलिंग पावर सारे दिन में यूज़ करो। पावरफुल ब्रेक द्वारा मन-बुद्धि को कन्ट्रोल करो, जहाँ मन-बुद्धि को लगाना चाहो वहाँ सेकण्ड में लग जाए।

विशेष सूचना - मास के तीसरे रविवार का योग अभ्यास

आज मास का तीसरा रविवार है, सभी भाई बहिनें संगठित रूप में एकत्रित होकर सायं 6.30 से 7.30 बजे तक अपने फरिश्ते स्वरूप द्वारा भटकती हुई दु:खी अशान्त आत्माओं को सुख शान्ति की पवित्र किरणें देकर उन्हें सहारे दाता परमात्मा बाप की स्मृति दिलाने की सेवा करें।