19-09-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - तुम गॉड फादरली स्टूडेन्ट हो, तुम्हें सच्चा-सच्चा रूप-बसन्त बन अपने मुख से सदैव ज्ञान रत्न ही निकालने हैं''

प्रश्नः-
बाबा बच्चों को सुरजीत करने के लिए कौन सी संजीवनी बूटी देते हैं?

उत्तर:-
मनमनाभव अर्थात् बाप को याद करो। नशा रहे - परमात्मा द्वारा हम देवता बनने के लिए अथवा राज्य पद पाने के लिए यह पढ़ाई पढ़ रहे हैं। यह स्मृति ही संजीवनी बूटी है, जो सुरजीत कर देती है। उनकी अवस्था कभी मुरझा नहीं सकती। वे सदा अपनी जांच करते दूसरों को भी सावधान करते रहेंगे।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अपना और दूसरों का कल्याण करना है। अंधों की लाठी बनना है। कभी कोई उल्टी बातें सुनायें तो उनसे सावधान रहना है।

2) मन्सा-वाचा-कर्मणा पवित्र बनना है। हम स्टूडेन्ट हैं, भगवान हमें देवता बनने की पढ़ाई पढ़ा रहे हैं, इसी खुशी में रहना है।

वरदान:-
साथी और साक्षीपन की स्मृति द्वारा सब बन्धनों से मुक्त होने वाले सर्व शक्ति सम्पन्न भव

सर्व शक्तियों से सम्पन्न बन अधीनता से परे होने के लिए दो शब्द सदा याद रहें - एक साक्षी दूसरा-साथी। इससे बन्धनमुक्त अवस्था जल्दी बन जायेगी। सर्वशक्तिवान बाप का साथ है तो सर्व शक्तियां स्वत: प्राप्त हो जाती हैं और साक्षी बनकर चलने से कोई भी बन्धन में फंसेंगे नहीं। निमित्त मात्र इस शरीर में रहकर कर्तव्य किया और साक्षी हो गये - इसका विशेष अभ्यास बढ़ाओ।

स्लोगन:-
अशुद्ध और शुद्ध दोनों की युद्ध है तो ब्राह्मण के बजाए क्षत्रिय हो।

ये अव्यक्त इशारे - अब अपने दाता स्वरूप को प्रत्यक्ष करो

तड़फती हुई या भिखारी प्यासी आत्माओं की प्यास मिटाने के लिए अपने को अतीन्द्रिय सुख वा सर्व शक्तियों से भरपूर करो। जितना सर्व शक्तियों का खज़ाना, अतीन्द्रिय सुख का ख़ज़ाना इकट्ठा होगा तो अपनी स्थिति कायम रहेगी और अन्य आत्माओं को भी सम्पन्न बना सकेंगे। आप सर्व की झोली भरने वाले दाता के बच्चे हो, सबको देना है। यह देने का दृश्य बहुत जल्दी सामने आयेगा।