20-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम ईश्वरीय
सैलवेशन आर्मी हो, तुम्हें सबको सद्गति देनी है, सबकी प्रीत एक बाप से जुटानी है''
प्रश्नः-
मनुष्य अपना
अक्ल किस बात में लगाते हैं और तुम्हें अपना अक्ल कहाँ लगाना है?
उत्तर:-
मनुष्य तो अपना
अक्ल आकाश और सृष्टि का अन्त पाने में लगा रहे हैं लेकिन इससे तो कोई फायदा नहीं।
इसका अन्त तो मिल नहीं सकता। तुम बच्चे अपना अक्ल लगाते हो - पूज्य बनने में। उन्हें
दुनिया नहीं पूजेगी। तुम बच्चे तो पूज्य देवता बनते हो।
गीत:-
तुम्हें पाके
हमने...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) और सबसे बुद्धि की प्रीत तोड़ एक बाप से जोड़नी है और सबकी प्रीत एक
बाप से जुड़ाने की सेवा करनी है।
2) सच्चा-सच्चा रूहानी खिदमतगार बनना है। अपना भी कल्याण करना है और दूसरों को
भी रास्ता बताना है। अवस्था बहुत खुशमिज़ाज बनानी है।
वरदान:-
अपने श्रेष्ठ
व्यवहार द्वारा सर्व आत्माओं को सुख देने वाली महान आत्मा भव
जो महान आत्मायें होती हैं
उनके हर व्यवहार से सर्व आत्माओं को सुख का दान मिलता है। वह सुख देते और सुख लेते
हैं। तो चेक करो कि महान आत्मा के हिसाब से सारे दिन में सबको सुख दिया, पुण्य का
काम किया। पुण्य अर्थात् किसको ऐसी चीज़ देना जिससे उस आत्मा से आशीर्वाद निकले। तो
चेक करो कि हर आत्मा से आशीर्वाद मिल रही है। किसी को भी दु:ख दिया वा लिया तो नहीं!
तब कहेंगे महान आत्मा।
स्लोगन:-
करने
के बाद सोचना ही पश्चाताप का रूप है।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
संस्कार वा नेचर
तो हर एक की अपनी-अपनी है लेकिन सर्व का स्नेही और सर्व बातों में, सम्बन्ध में सफल,
मन्सा में विजयी और वाणी में मधुरता तब आ सकती है जब इज़ी नेचर हो। इज़ी नेचर
अर्थात् जैसा समय, जैसा व्यक्ति, जैसा सरकमस्टांश उसको परखते हुए अपने को इज़ी कर
देवे। इज़ी अर्थात् मिलनसार, मोल्ड कर लेने वाला। इज़ी माना अलबेला नहीं।