20-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बेगर से प्रिन्स बनने का आधार पवित्रता है,
पवित्र बनने से ही पवित्र दुनिया की राजाई मिलती है''
प्रश्नः-
इस पाठशाला का
कौन सा पाठ तुम्हें मनुष्य से देवता बना देता है?
उत्तर:-
तुम इस पाठशाला
में रोज़ यही पाठ पढ़ते हो कि हम शरीर नहीं आत्मा हैं। आत्म-अभिमानी बनने से ही तुम
मनुष्य से देवता, नर से नारायण बन जाते हो। इस समय सब मनुष्य मात्र पुजारी अर्थात्
पतित देह-अभिमानी हैं इसलिए पतित-पावन बाप को पुकारते रहते हैं।
गीत:-
छोड़ भी दे
आकाश सिंहासन...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
पतित से पावन बनने के लिए ज्ञान और योग में मजबूत होना है। आत्मा में जो खाद पड़ी
है उसे याद की मेहनत से निकालना है।
2) हम ब्रह्मा मुख
वंशावली ब्राह्मण चोटी हैं इस नशे में रहना है। ब्राह्मण ही वर्से के अधिकारी हैं
क्योंकि शिवबाबा के पोत्रे हैं।
वरदान:-
अपनी पावरफुल
वृत्ति द्वारा पतित वायुमण्डल को परिवर्तन करने वाले मास्टर पतित-पावनी भव
कैसा भी वायुमण्डल हो
लेकिन स्वयं की शक्तिशाली वृत्ति वायुमण्डल को बदल सकती है। वायुमण्डल विकारी हो
लेकिन स्वयं की वृत्ति निर्विकारी हो। जो पतितों को पावन बनाने वाले हैं वो पतित
वायुमण्डल के वशीभूत नहीं हो सकते। मास्टर पतित-पावनी बन स्वयं की पावरफुल वृत्ति
से अपवित्र वा कमजोरी का वायुमण्डल मिटाओ, उसका वर्णन कर वायुमण्डल नहीं बनाओ।
कमजोर वा पतित वायुमण्डल का वर्णन करना भी पाप है।
स्लोगन:-
अब धरनी में
परमात्म पहचान का बीज डालो तो प्रत्यक्षता होगी।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
योग माना शान्ति की
शक्ति। यह शान्ति की शक्ति बहुत सहज स्व को और दूसरों को परिवर्तन करती है, इससे
व्यक्ति भी बदल जायेंगे तो प्रकृति भी बदल जायेगी। व्यक्तियों को तो मुख का कोर्स
करा लेते हो लेकिन प्रकृति को बदलने के लिए शान्ति की शक्ति अर्थात् योगबल ही चाहिए।
योग में जब और सब संकल्प शान्त हो जाते हैं, एक ही संकल्प रहता “बाप और मैं'' इसी
को ही पावरफुल योग कहते हैं। बाप के मिलन की अनुभूति के सिवाए और सब संकल्प समा जायें
तब कहेंगे ज्वाला रूप की याद, जिससे परिवर्तन होता है।