20-08-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम्हें इस पाप की दुनिया से निकाल चैन की दुनिया में ले जाने, बाप द्वारा तुम्हें सुख-शान्ति की दो सौगातें मिलती हैं''

प्रश्नः-
सारी दुनिया में सच्ची-सच्ची नन्स तुम हो, सच्ची नन्स किसे कहेंगे?

उत्तर:-
सच्ची नन्स वह जिनकी बुद्धि में एक की याद हो अर्थात् नन बट वन। वे अपने को भल नन्स कहलाती हैं लेकिन उनकी बुद्धि में सिर्फ एक क्राइस्ट की याद नहीं, क्राइस्ट को भी गॉड का बच्चा कहेंगे। तो उनकी बुद्धि में दो हैं और तुम्हारी बुद्धि में एक बाप है इसलिए तुम सच्ची-सच्ची नन्स हो। तुम्हें बाप का फरमान है पवित्र रहना है।

गीत:-
इस पाप की दुनिया से...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) अब अशुद्ध कामनाओं का त्याग कर शुद्ध कामनायें रखनी हैं। सबसे शुद्ध कामना है पवित्र बनकर पवित्र दुनिया का मालिक बनें...। कोई भी भूल को छिपाकर अपने आपको ठगना नहीं है। धर्मराज बाप से सदा सच्चा रहना है।

2) ज्ञान चिता पर बैठ इस पढ़ाई में रेस कर भविष्य नई दुनिया में ऊंच पद पाना है। योग अग्नि से विकर्मों के खाते को दग्ध करना है।

वरदान:-
बुद्धि की प्रीत एक प्रीतम से लगाकर सदा सम्मुख की अनुभूति करने वाले विजयी रत्न भव

प्रीत बुद्धि अर्थात् बुद्धि की लगन एक प्रीतम के साथ लगी हुई हो। जिसकी एक के साथ प्रीत है उनकी अन्य किसी भी व्यक्ति वा वैभव के साथ प्रीत जुट नहीं सकती। वे सदा बापदादा को अपने सम्मुख अनुभव करेंगे। उन्हें मन्सा में भी श्रीमत के विपरीत व्यर्थ संकल्प वा विकल्प नहीं आ सकते। उनके मुख से वा दिल से यही बोल निकलते - तुम्हीं से खाऊं, तुम्हीं से बैठूँ....तुम्हीं से सर्व संबंध निभाऊं..ऐसे सदा प्रीत बुद्धि रहने वाले ही विजयी रत्न बनते हैं।

स्लोगन:-
चाहिए-चाहिए का संकल्प आना भी रॉयल रूप का मांगना है।

ये अव्यक्त इशारे - अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो

संगमयुग पर बापदादा ने सभी बच्चों को पहला व्रत दिया है - “सम्पूर्ण पवित्र भव''। यह पवित्रता का व्रत सिर्फ ब्रह्मचर्य का व्रत नहीं है लेकिन ब्रह्मा बाप समान हर बोल में पवित्रता का वायब्रेशन समाया हुआ हो। हर संकल्प में पवित्रता का महत्व हो। हर कर्म में, कर्मयोगी जीवन का अनुभव हो - इसको कहा जाता है ब्रह्मचारी सो ब्रह्माचरी।