21-04-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - ज्ञान सागर बाप आये हैं - तुम बच्चों के सम्मुख ज्ञान डांस करने, तुम होशियार सर्विसएबुल बनो तो ज्ञान की डांस भी अच्छी हो''

प्रश्नः-
संगमयुग पर तुम बच्चे अपने में कौन-सी हॉबी (आदत) डालते हो?

उत्तर:-
याद में रहने की। यही है रूहानी हॉबी। इस हॉबी के साथ-साथ तुम्हें दिव्य और अलौकिक कर्म भी करने हैं। तुम हो ब्राह्मण, तुम्हें सबको सच्ची-सच्ची कथा जरूर सुनानी है। सर्विस की भी तुम बच्चों में हॉबी होनी चाहिए।

गीत:-
धीरज धर मनुवा....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) इस पुरानी देह और दुनिया को बुद्धि से भूल बाप और घर को याद करना है। सदा इसी खुशी में रहना है कि अभी हमारे सुख के दिन आये कि आये।

2) नॉलेजफुल बाप से जो नॉलेज मिली है उसका सिमरण कर दिमाग को पुर (भरपूर) रखना है। देह-अभिमान में आकर कभी भी किसी प्रकार का घुटका नहीं खाना है।

वरदान:-
सदा एकरस स्थिति के तख्त पर विराजमान रहने वाले बापदादा के दिलतख्त नशीन भव

सभी से श्रेष्ठ तख्त बापदादा के दिलतख्त नशीन बनना है। लेकिन इस तख्त पर बैठने के लिए अचल, अडोल, एकरस स्थिति का तख्त चाहिए। अगर इस स्थिति के तख्त पर स्थित नहीं हो पाते तो बापदादा के दिल रूपी तख्त पर स्थिति नहीं हो सकते। इसके लिए अपने भृकुटि के तख्त पर अकालमूर्त बन स्थित हो जाओ, इस तख्त से बार-बार डगमग न हो तो बापदादा के दिल तख्त पर विराजमान हो सकेंगे।

स्लोगन:-
शुभचिंतन द्वारा निगेटिव को पॉजिटिव में परिवर्तन करो।

ये अव्यक्त इशारे - महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो

ब्रह्मा बाप अपने हर बच्चे के चेहरे पर, एक तो सदा रूहानियत की मुस्कराहट देखना चाहते हैं और दूसरा - मुख से सदा मधुर बोल सुनना चाहते हैं। एक शब्द भी मधुरता के बिना नहीं हो। चेहरे पर रूहानियत हो, मुख में मधुरता हो और मन-बुद्धि में सदा शुभ भावना, रहमदिल की भावना, दातापन की भावना हो। हर कदम में फालो फादर हो, यही पालना का रिटर्न दो।