21-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अभी तक तुम सुनी सुनाई बातों पर चलते आये,
अब बाप तुम्हें डायरेक्ट सुनाकर आपसमान नॉलेजफुल बनाते हैं''
प्रश्नः-
अच्छे
पुरुषार्थी बच्चों की निशानी तथा उनकी अवस्था का गायन क्या है?
उत्तर:-
अच्छे
पुरुषार्थी बच्चे - मदर, फादर को पूरा-पूरा फालो करेंगे। अपनी जीवन पर तरस खायेंगे।
पूरा-पूरा अटेन्शन रखेंगे। थोड़ा भी समय निकाल बाबा की याद में जरूर बैठेंगे। उनकी
अवस्था का गायन है - अचल, अडोल, स्थिर। उन्हें ही महावीर कहा जाता है।
गीत:-
भोलेनाथ से
निराला...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
रूहानी पढ़ाई पढ़कर सच्ची कमाई करनी और करानी है। घर चलने का मैसेज सबको देना है।
अब कोई भी विकर्म नहीं करना है।
2) सवेरे उठकर प्यार
से बाप को याद करना है। छोटी-मोटी बातों में छुईमुई नहीं बनना है। अवस्था को
अचल-अडोल बनाना है।
वरदान:-
नॉलेज की
लाइट-माइट द्वारा अपने लक को जगाने वाले सदा सफलतामूर्त भव
जो बच्चे नॉलेज की
लाइट और माइट से आदि-मध्य-अन्त को जानकर पुरुषार्थ करते हैं, उन्हें सफलता अवश्य
प्राप्त होती है। सफलता प्राप्त होना भी लक की निशानी है। नॉलेजफुल बनना ही लक को
जगाने का साधन है। नॉलेज सिर्फ रचयिता और रचना की नहीं लेकिन नॉलेजफुल अर्थात् हर
संकल्प, हर शब्द और हर कर्म में ज्ञान स्वरूप हो तब सफलतामूर्त बनेंगे। अगर
पुरुषार्थ सही होते भी सफलता नहीं दिखाई देती है तो यही समझना चाहिए कि यह असफलता
नहीं, परिपक्वता का साधन है।
स्लोगन:-
न्यारे बनकर
कर्मेन्द्रियों से कर्म कराओ तो कर्मातीत स्थिति का अनुभव सहज कर सकेंगे।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
जब योग में बैठते हो
तो समाने की शक्ति सेकण्ड में यूज़ करो। सेवा के संकल्प भी समा जाएं इतनी शक्ति हो
जो स्टॉप कहा और स्टॉप हो जाए। फुल ब्रेक लगे, ढीली ब्रेक नहीं। अगर एक सेकण्ड के
बजाए ज्यादा समय लग जाता है तो समाने की शक्ति कमजोर कहंगे।