21-08-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाप मीठे से मीठी सैक्रीन है इसलिए और सब
बातें छोड़ उस बाप को याद करो तो मीठी सैक्रीन बन जायेंगे''
प्रश्नः-
तुम बाप द्वारा
श्रीमत लेकर अपने अन्दर कौन से संस्कार भर रहे हो?
उत्तर:-
भविष्य में
बिगर वजीर सारे विश्व पर राज्य करने के। तुम यहाँ आये ही हो भविष्य राजधानी चलाने
की श्रीमत लेने। बाप तुम्हें ऐसी श्रीमत दे देते जो आधाकल्प तक कोई की राय लेने की
दरकार नहीं। राय उन्हें लेनी पड़ती जिनकी बुद्धि कमजोर हो।
गीत:-
तुम्हीं हो
माता...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
ज्ञान रत्नों से अपनी झोली भरनी है। किसी भी प्रकार का संशय नहीं उठाना है। जितना
हो सके बाप को याद करने का पुरुषार्थ कर पावन बनना है। बाकी प्रश्नों में नहीं जाना
है।
2) एक बाप से सच्ची
प्रीत रख बाप समान मीठी सैक्रीन बनना है।
वरदान:-
सदा ज्ञान
सूर्य के सम्मुख रहने वाले अन्तर्मुखी, स्वमानधारी भव
जैसे सूर्य के सामने
देखने से सूर्य की किरणें अवश्य आती हैं, ऐसे जो बच्चे ज्ञान सूर्य बाप के सदा
सम्मुख रहते हैं वो ज्ञान सूर्य के सर्व गुणों की किरणें स्वयं में अनुभव करते हैं।
उनकी सूरत पर अन्तर्मुखता की झलक और संगमयुग के वा भविष्य के सर्व स्वमान की फलक
दिखाई देती है। इसके लिए सदा स्मृति में रहे कि यह अन्तिम घड़ी है। किसी भी घड़ी इस
तन का विनाश हो सकता है इसलिए सदा प्रीत बुद्धि बन ज्ञान सूर्य के सम्मुख रह
अन्तर्मुखता वा स्वमान की अनुभूति में रहना है।
स्लोगन:-
सदा उड़ती कला
में उड़ना ही झमेलों के पहाड़ को क्रास करना है।
ये अव्यक्त इशारे -
अपवित्रता के बीज को भी समाप्त कर सम्पूर्ण स्वच्छ (पवित्र) बनो
पवित्रता ही महानता
है, यही योगी जीवन का आधार है। जरा भी अंशमात्र संकल्प में भी किसी प्रकार की
अपवित्रता है तो जहाँ अपवित्रता का अंश है वहाँ पवित्र बाप की याद जो है, जैसा है
वैसे नहीं आ सकती इसलिए मन्सा में भी अपवित्रता के अंश को समाप्त कर सम्पूर्ण
स्वच्छ बनो। सदा यही स्मृति रहे कि मैं पूज्य आत्मा इस शरीर रूपी मन्दिर में
विराजमान हूँ।