22-04-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम बाप की
याद में एक्यूरेट रहो तो तुम्हारा चेहरा सदा चमकता हुआ खुशनुम: रहेगा''
प्रश्नः-
याद में बैठने
की विधि कौन सी है तथा उससे लाभ क्या-क्या होता है?
उत्तर:-
जब याद में
बैठते हो तो बुद्धि से सब धन्धेधोरी आदि की पंचायत को भूल अपने को देही (आत्मा) समझो।
देह और देह के सम्बन्धों की बड़ी जाल है, उस जाल को हप करके देह-अभिमान से परे हो
जाओ अर्थात् आप मुये मर गई दुनिया। जीते जी सब कुछ भूल एक बाप की याद रहे, यह है
अशरीरी अवस्था, इससे आत्मा की कट उतरती जायेगी।
गीत:-
रात के राही...
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप के हर डायरेक्शन पर चलकर अपनी उन्नति करनी है। एक बाप से
सच्ची-सच्ची प्रीत रखनी है। याद में ही भोजन बनाना और खाना है।
2) स्प्रीचुअल लाइट हाउस बन सबको मुक्ति-जीवनमुक्ति का रास्ता बताना है। बाप
समान कल्याणकारी जरूर बनना है।
वरदान:-
ईश्वरीय शान
में स्थित रह हर कर्म शानदार बनाने वाले सर्व परेशानियों से मुक्त भव
सदा इसी ईश्वरीय शान में
रहो कि मैं बापदादा का नूरे रत्न हूँ, हमारे नयनों वा नज़रों में कोई भी चीज़ समा
नहीं सकती। इस शान में रहने से भिन्न-भिन्न प्रकार की परेशानियां स्वत: समाप्त हो
जायेंगी। कोई भी प्रकार की कम्पलेन नहीं रह सकती। जितना जो अपनी ऊंची शान में स्थित
रहते हैं उन्हें मान भी स्वत: प्राप्त होता है और उनके हर कर्म शानदार होते हैं।
स्लोगन:-
ट्रस्टी
वह है जो अपना सब कुछ बाप हवाले कर दे।
ये अव्यक्त इशारे
- महान बनने के लिए मधुरता और नम्रता का गुण धारण करो
आपके हर बोल में
मधुरता, सन्तुष्टता, सरलता की नवीनता हो। ब्राह्मण आत्माओं के बोल साधारण बोल न हो।
यही महानता और यही नवीनता है। मधुर बोल, मधुर संस्कार, मधुर स्वभाव द्वारा दूसरों
का भी मुख मीठा कराते रहो। “सदा अथक भव और मधुर भव'' के वरदानों से बढ़ते, उड़ते चलो।